#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १४ - दि. ०७.०६.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग १४ : दि . ०७.०६.२०२३

🚩जय श्रीराम🚩

शिवजी के विरक्तीपूर्ण रुप पर हमने कल तक विचार किया था।
अब हम उनकी शक्तियों के आख्यान का आरंभ करेंगे !
इस संन्यासी जैसे , रुपसज्जा के प्रति उदासीन देवता का एक और अद्भुत रुप है , परमशक्तिशाली, विविध अस्त्रों के निर्माता, युद्धकुशल शिवजी का प्रचंड रुप !

प्रथम हम उनके शस्त्रों पर विचार करेंगे ।

शिवजी का धनुष्य 'पिनाक' कहलाता है । इस पिनाक धनुष्य का आकार और वजन इतना अधिक है कि मनुष्य के लिए ही नहीं, अपितु रावण जैसे अत्यंत शक्तिमान असुर के लिए भी इसे उठाकर प्रत्यंचा खींचना असंभव था।

पिनाक धनुष्य केवल वजन में ही अधिक नहीं , यह एक अद्भुत शस्त्र हैं जिसका उपयोग करने से विश्व में प्रलय भी हो सकता है।

शिवजी ने इस धनुष्य की प्रत्यंचा (रस्सी / rope) के लिए अपने गले का सर्प अर्थात वासुकी नाग का प्रयोग किया था और इस धनुष्य से उन्होने त्रिपुरा (तीन पुर = तीन नगर ) का नाश किया था ।

(For the unversed, प्रत्यंचा= धनुष्य की रस्सी जिसे खींचकर बाण चलाया जाता है.) 

असुरों की तीनो नगरियों का शिवजी द्वारा एक ही समय में (simultaneously) नाश करने की कहानी अत्यंत रोमांचित करनेवाली हैं , परंतु कुछ अधिक लंबी है, इसलिए हम आख्यान को कल आगे बढ़ाएंगे......

चलते - चलते , यह केवल शिवपुराण नही हैं जिसमे हम बस कहानियाँ सुनेंगे... इन कथाओं के मूल में गहरे अर्थ है, बहुत गहरे अर्थ .. जिनपर हम विचार करते रहेंगे । 

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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