#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १५ - दि. ०८.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १५ : दि . ०८ ०६.२०२३
🚩जय श्रीराम🚩
गणित की प्राथमिक तैयारी के रूप में पहाडे (tables in English/ मराठी : पाढे ) पढाए जाते है....
भाषाओं की शिक्षा (education) में व्याकरण का महत्व है....
उसी प्रकार देवताओं के आख्यान से पूर्व 'देवताओं द्वारा साधना से प्रसन्न होकर वर प्रदान करना' इस विषय पर विचार करना आवश्यक है !
👆🏼इसे हम आधुनिक काल के उदाहरणों से समझने का प्रयत्न करेंगे 👇🏼
वृत्ती से उद्दंड बच्चा / बच्ची यदि NEET/ JEE अथवा अन्य कठिन परिक्षा पास करेगा / करेगी तो उसे उसकी योग्यतानुसार शैक्षणिक संस्था में प्रवेश देना ही पडता है।
पदवी प्राप्त करने के पश्चात वह समाज में कुछ अनुचित करेगा इसकी आशंका होनेपर भी उसे प्रवेश नकारा नहीं जा सकता है।
अथवा, मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से Computer Engineering की पदवी प्राप्त करने पर वह कर्तव्य बुद्धी से कार्य करेगा/ करेगी या Hacker बनेगा / बनेगी इसकी शंका होनेपर भी उसे admission से रोका नहीं जा सकता।
अत्यंत भ्रष्टाचारी परिवार से आए हुए और उसी मानसिकता वाले व्यक्ती को भी बुद्धी और क्षमता के आधारपर नौकरी तो देनी ही पडती है। यह तो नहीं कहा जा सकता है कि 'आगे तुम भी तो भष्ट्राचार ही करोगे / करोगी, इसलिए अभी तुम्हे नौकरी नहीं देंगे'।
ठीक इसी प्रकार हिंसक वृत्ती के असुरों को वर देना देवताओं की विवशता हैं। असुरों ने यदि साधना की है तो उन्हे वर देना ही होगा। निष्पक्षता यह देवताओं का गुण है।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन वरों का उपयोग कर असुर जब अत्याचार करते है तो देवता उनके विध्वंस की व्यवस्था कर जीवसृष्टी के तारणहार बनते है।
शिवभगवान द्वारा दिए गए वरों को👆🏼इस संदर्भ में देखना उचित होगा।
👆🏼यह प्रस्तावना दीर्घ तो थी , परंतु अत्यावश्यक भी थी क्योंकि इसके अभाव में अनेक आख्यानों का अर्थ ग्रहण करना कठिन /असंभव है ।
अर्थात, शिवाख्यान की एक अत्यंत रोमांचपूर्ण कथा के लिए पुनः अगले दिन तक प्रतीक्षा करनी होगी जिसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ ।
शिवगुणगान की अगली कडी में कल आगे बढेंगे ।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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