#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ६ - दि. ३०.०५.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ६ : दि. ३०.०५.२०२३

🚩जय श्रीराम🚩

श्री गणेशजी की जो मूर्ति / प्रतिमा / रुप हम नित्य देखते है उसके अर्थ पर हम आज विचार करेंगे ।
प्रत्येक देवता का रुप अनेक प्रतिकों से मिलकर बना हैं । प्रतिक हमारे दैनंदिन जीवन का भाग है जैसे -
आदरणीय व्यक्तियों प्रति सम्मान की भावना का प्रतिक = नमस्कार करना
अपने से आयु में छोटे लोगों के प्रति प्रेम और सद्भावना का प्रतिक = आशीर्वाद देना
दूसरों के प्रति प्रेम का प्रतिक = उन्हे वस्तूएँ भेट करना
देश की अस्मिता का प्रतिक = राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगीत 
यह केवल उदाहरण है ।
इसी प्रकार गणेशजी का रुप भी प्रतिकों से संपन्न है👇🏼

गणेशजी का मस्तक हाथी का है !
हाथी ही क्यो ?
हिरन , बैल , उंट , घोडा , शेर क्यों नही ?
क्योंकी हाथी वन का सबसे बुद्धीमान प्राणी है ।
साथ ही, हाथी वन का ऐसा प्राणी है जिसके चलने से वन में मार्ग बनते है, वन के प्राणी इन्ही के रास्तो पर चलते है। अर्थात वन में हाथी (और जीवन में गणेशजी ) के पीछे चलने से मार्ग की बाधाएँ दूर होती है और अन्य सभी के लिए आगे बढने का रास्ता बनता है।
श्री गणेशजी का हाथीमुख इन्ही सब का प्रतीक है।
वे अत्यंत बुद्धीमान है और बुद्धीदाता भी ...
उन्हे प्रत्येक शुभकार्य में प्रथम पूजा का मान है क्योंकि वे मार्ग में आनेवाली प्रत्येक बाधा (= संकट) दूर करते हैं ।

श्री गणेशजी के कान बहुत बडे हैं । क्योंकि बुद्धीमान व्यक्ति सबकी बात सुनते हैं (बोलते कम हैं, सुनते अधिक है ) I

उनके हाथीमुख की सुंड दो अत्यंत महत्वपूर्ण गुणों का प्रतीक है । हाथी जिस प्रकार रास्ते में आनेवाले पेड अपनी ताकद से उखाडते है , यह उस ताकद (शक्ती) का प्रतिक है। साथ ही भूमि पर पडी हुई छोटी से छोटी वस्तु (यहाँ तक की छोटी सुई या छोटासा टुकडा ) सूंड से उठाया जा सकता है । तो यह सुक्ष्म = बारीकी से काम करने के कौशल का प्रतिक भी है।

गणेशजी की भारी भरकम तोंद .....
वस्तुतः यह जगद्कल्याण और सुखी जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व का प्रतीक है.... क्षमाशीलता ! 
गणेशजी हमारे अपराधों को स्वयं के पेट में रखकर उदारता से क्षमा करते है। पेट में रखने का अर्थ हैं इसका रहस्य सुरक्षित रखना, किसी और व्यक्ति से उसकी चर्चा ना करना !
अज्ञानता के कारण हमसे होनेवाले अपराधों को देवता द्वारा की जानेवाली क्षमा का यह सबसे उदात्त प्रतिक है । अच्छाई और बुराई दोनों को ही सहज भाव से स्वीकार करने के महान गुण को दर्शाता हैं गणेशजी का भारीभरकम पेट !

आगे भी हम इसकी चर्चा जारी रखेंगे ..
कल पुनः मिलते है ...

गर्व से कहे👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳


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