#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग २ - दि. २६.०५.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग २ - दि. २६ .०५ .२०२३

🚩 जय श्रीराम🚩

उपक्रम की रुपरेखा (Way forward)

हम हमारे देवी - देवताएँ , हमारी धार्मिक आस्थाएँ और मान्यताएँ, हमारे हिंदु त्योहार और उत्सव, हमारे धर्मप्रतिक आदि विविध विषयों पर चर्चा करेंगे ।
एक बात स्पष्ट करना चाहूंगी। मैं विद्वान या संत नहीं हूँ । मैं एक साधारणसी मध्यवर्गीय गृहिणी हूँ। In short 'I am NOT MISS KNOW IT ALL'. 

कुछ मैंने अपने माता - पिता और परिजनों से सीखा , कुछ पुस्तकों में पढ़ा , कुछ का अर्थ मैंने अपनी समझ और तर्क से लगाया हैं । 
इसलिए आपको पूर्ण अधिकार है की आप प्रश्न करें और शंकाएँ पूछे । इसके उपरांत भी आपका मत भिन्न / अलग हो सकता है ।

मेरा एक ही अनुरोध है कि हम Greater Good का विचार करें । छोटी छोटी मतभिन्नताओं को हमारा प्रिय हिंदु धर्म अवश्य मान्यता देता है । लेकिन इन मतभेदों की कैंची चलाकर हम अपने प्रिय हिंदु धर्म का पवित्र वस्त्र फाडने से बचे । 
हमारा उद्देश हिंदुधर्म का उज्वल भविष्य सुनिश्चित करना है ।  स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करना नहीं हैं 😌

प्रथम हम हमारे देवी देवताओं के संबध में बात करेंगे ।

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शुभकार्य का प्रारंभ 'गणेश स्तवन' अथवा 'गणेश पूजा' से किया जाता हैं । अतः हम भी प्रथम नमन श्री गणेशजी का ही करेंगे 🙏🏼

अत्यंत अद्भुत कहानी हैं श्री गणेशजी के जन्म की!

मान्यता यह हैं की एक दिन देवी पार्वती स्नान करना चाहती थी तब उनके घर में कोई नहीं था । द्वार पर कोई तो हो रक्षा के लिए !
इसलिए उन्होने स्नान के लिए जो हल्दी का लेप बनाया था उसीसे एक बालक की प्रतिमा का निर्माण किया और उसमें प्राण फूंके । और उसे द्वाररक्षण की जिम्मेदारी सौंपकर वह स्थान करने गई ।
वैसे एक मान्यता यह भी हैं कि उन्होने अपने शरीर का मैल निकालकर बालक की मूर्ती बनाई। 

हम इसकी चर्चा भी आगे अवश्य करेंगे !

कुछ समय पश्चात उनके पतिदेव अर्थात शिवजी घर लौटे । लेकिन प्रवेशद्वार पर बालक ने उन्हे रोक लिया । क्योंकि वह तो शिवजी नहीं जानता था । शिवजी ने गृहस्वामी होने की बात बताई तब भी बालक ने उन्हे घर में प्रवेश नहीं करने दिया , माता का आदेश जो था की कोई भी अंदर ना आने पाए ! 
शिवजी क्रोधित हुए और उन्होने बालक का मस्तक धड से अलग कर दिया ।
स्नान के पश्चात देवी ने बालक की स्थिति देखी । वह दुखी और क्रोधित भी हुई । उनके क्रोध के कारण विश्व की हानि ना हो इसलिए विश्वनिर्माता ब्रह्माजी ने मध्यस्थता की । शिवजी ने अपने वाहन और प्रिय भक्त नंदी से कहा की उत्तर दिशा की ओर मुख रखकर भूमिपर पडा हुआ जो पहला प्राणी मिले उसका मस्तक ले आओ । और इस प्रकार हाथी के एक बच्चे का मस्तक प्राप्त होने पर बालक को पुनर्जिवित किया गया ।
हाथी के मुखवाले पुत्र को देखकर देवी को आशंका हुई की कहीं इस बालक की जगहंसाई ना हो ! 
इसलिए उन्हे वर दिया गया की उनका यह पुत्र 'प्रथम नमन और पूजा' का अधिकारी होगा ।
यह तो थी श्री गणेशजी की जन्मकथा !
आगे हम इस कथामें निहित / गर्भित अर्थ (implied meaning) को भी देखेंगे ...

कल पुनः मिलेंगे ...

गर्व से कहें👇🏼 

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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