#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ४ - दि. २८.०५.२०२३

हिंदु धर्म - संस्कार : 
भाग ४ - दि . २८ .०५. २०२३

🚩जय श्रीराम🚩

कल हमने 'अखंड सावधानता' पर विचार किया था।
भगवान श्री गणेशजी की जन्मकथा से सावधानता का सूत्र जुडे होने पर बात की थी।
पार्वतीमाता ने द्वाररक्षा की जो व्यवस्था की थी, उसे हम हमारे प्रिय भारत के इतिहास के संदर्भ में देख सकते हैं ।
शिवजी और माता का निवासस्थान हैं कैलाश पर्वत । हिमालय की इस दुर्गम घाटी में कौन घुसेगा साक्षात शिवजी के घर में ?
परंतु , शत्रु के आने की आशंका हो या ना हो , सुरक्षा का प्रबंध पक्का होना चाहिए !
इसे भूलने की भारी किमत चुकानी पडती हैं !

चीन जैसे विश्वासघातकी पडोसी पर विश्वास रखकर भारत की पूर्व दिशा में रक्षा का उचित प्रबंध ना करने की कीमत हमने १९६१ के युद्ध में भारत का हजारो चौरस किलोमीटर का भूभाग गँवाकर चुकाई हैं (यह आंकडा 40000 square km तक बताया गया हैं, सरकारी रिकार्ड के अनुसार अधिकृत आंकडा भिन्न हो सकता हैं )

कारगिल युद्ध का भी कारण यहीं था । 
हिमालय की पहाडियाँ बर्फिली हैं..... 
यहाँ की सर्दियों में  पाकिस्तान जैसा अति विश्वासघातकी पडोसी भी भारत में घुसने की धृष्टता नहीं करेगा इस विचार से हमारी सैनिक चौंकियाँ छोड दी गई.....
कोई सुरक्षा नही.....
सैनिक नही.....
किसी को पता ही नहीं चला की सर्दियों में घाटी से पीछे हटने के समझौते को तोडकर पाकिस्तान ने अपनी सेना इन बर्फिले  पहाडोपर तैनात कर भारत की भूमि हडपने की पूर्ण तैयारी कर ली थी 😖

सदियों पहले माता ने द्वार पर शत्रु के आने की आशंका ना होनेपर भी रक्षा का समुचित प्रबंध किया था और माता को भक्तीभाव से पूजनेवाले हम भारतवासी उन्ही की सीख भूल गए थे !

परिणाम - 
हजारो चौरस मील का भूभाग शत्रु ने हडप लिया और हमारे कई वीर सैनिक और सैन्याधिकारी प्राण गँवा बैठे ! 😢

तत्वज्ञानी George Santayana का प्रसिद्ध वचन हैं "Those who can not remember the past are condemned to repeat it !"

Winston Churchill ने भी यहीं बात दोहराई थी, यह कहकर कि 'Those who fail to learn from history are doomed to repeat it'

माता सामने खडी हो कर आदेश नहीं देती है ..
ना ही उपदेश करती हैं ..
तालियाँ और झांज बजाकर आरती करना यह भक्ति का अंतिम छोर नहीं हैं !
आरती के पश्चात हमारे मन में भी माता की सीख की झांज सदैव बजती रहनी चाहिए !
हम भले ही भूल गए थे , परंतु पार्वती माता के बुद्धीमान पुत्र ने गांठ बांध ली हैं माँ के उपदेश का सदैव पालन करने की !

गोलु मोलु सा यह बच्चा ..
इसका भारी-भरकम शरीर ..
इसकी फूली हुई तोंद..
इसका वाहन भी एक छोटा सा चूहा ..
परंतु श्रीगणेशजी ने अखंड सावधानता का कालातीत (timeless) आदर्श हमारे सम्मुख रखा हैं !

श्री गणेशजी के इन आदर्शों पर हम आगे विचार करेंगे !

गर्व से कहें 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳


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