#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १९ - दि. १२.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १९ : दि . १२.०६.२०२३
🚩जय श्री राम🚩
भगवान श्री शिव के संबध अनेक भ्रांतियाँ पायी जाती हैं।
शिवजी का रुप अनेक लोगों को विचित्र लगता है (देव जैसे तो नहीं दिखते हैं !).....
शिवजी की शक्तियाँ गूढ मानी जाती हैं (जैसे तीन महाअस्त्रों में से एक हैं पाशुपतास्त्र - अन्य दो हैं ब्रह्मास्त्र और नारायणास्त्र. इससे पूर्व भाग १६ में हमने 'त्रिपुर' के विनाश के संबध में चर्चा की थी। शिवजी के मंद मंद मुस्कुराने पर उन तीनो पुरों में अग्नि धधक उठी थी क्योंकि शिवजी ने तब पाशुपतास्त्र का प्रयोग किया था।
इस अस्त्र को धनुष्य द्वारा तो चलाया जा ही सकता है किंतु इसके लिए हाथों उपयोग अनिवार्य नहीं है। इस अस्त्र का प्रयोग मन / आँख अथवा शब्द द्वारा भी किया जा सकता है। ठीक उसी प्रकार जैसे 'त्रिपुर' पर चलाया गया था) .....
ब्रह्माजी तो विश्वनिर्माता है और वे अपनी सेना नहीं रखते.....
भगवान विष्णु की 'नारायणी सेना' है.....
देवी माँ ने स्वयं अनेक रुप धारण कर राक्षसों का निःपात किया हैं जिसका वर्णन श्री सप्तशती में किया गया है....
.... परंतु शिवजी के गण (उनके अनुयायी / सेना ) अत्यंत विचित्र है।
कौन हैं यह ?
भूत - प्रेत - पिशाच - पशु आदि....
मान्यता हैं कि यह सर्व पृथक योनि से हैं। इनके अंग में अस्थियाँ नहीं होती हैं, इनकी भाषा भी नहीं होती और इनके कोलाहल का अर्थ केवल शिवजी ही समझ पाते हैं।
प्रश्न यह है कि शिवजी को कोई ढंग की सेना नहीं मिली जो ऐसे विचित्र जीवों (❓) को संगी साथी बनाए घूमते रहते हैं ?
सीधे सपाट शब्दों में इसका उत्तर यह है कि तोता - मैना तो कोई भी पाल सकता हैं, किंतु शेर पालने की हिंमत सबकी नहीं होती❗
अतः हमें यह समझना होगा की शिवजी की कथित विचित्रता के पार्श्व में वस्तुतः उनका सामर्थ्य, उनकी शक्ति और उनका शिवस्वरूप है।
जैसें महासागरों की गहराइयों में वास करनेवाले अनेक जलचरों के विषय में हम नहीं जानते है, उसी प्रकार इस विश्व में (स्थूल - नश्वर देह में नहीं, अपितु) सूक्ष्म रूप से विचरने वाली अनेक योनियों को हम नहीं जानते। वैसे विविध संतों के चरित्रों में इस संबध मे विविध उल्लेख पाए जाते हैं।
विश्व में सुष्ट (सद्विचारी और कल्याणकारी ) तथा दुष्ट दोनो प्रकार की शाक्तियाँ हैं। दुष्ट शक्तियों पर नियंत्रण रखना, उनकी शक्तियों को अच्छे कार्य की ओर उन्मुख करना महत्वपूर्ण होता हैं। हम अपने घर की चारदिवार (compound) उँची कर ले और बाकी सारे विश्व में अंदाधुंद मची रहे ऐसी छोटी सोच देवता नहीं रखते है। वह अपनी समस्त शक्तियों के बलबूते पर दुष्टों को नकेल डालने का सामर्थ्य रखते है और इसकी पहल (initiative) भी करते है।
इन विचित्र प्रकार की शक्तियों को देख ना पाना अथवा उनके अस्तित्व का आभास ना होना हमारी क्षमताओं की मर्यादा है, उनके अस्तित्व को नकारने का साधन अथवा निमित्त नहीं !
स्वयं आराम - सुख और शांतिमय जीवन जीना इससे भी अधिक कठिन है दुष्ट विनाश के लिए तत्पर रहकर विश्व में शांति और न्याय प्रस्थापित करने के लिए सदैव तन कर खड़ा होना !
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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