#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग २० - दि. १३.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग २० : दि. १३.०६.२०२३
🚩जय श्रीराम 🚩
शिवजी के संबध में अनेक भ्रम और भ्रांतियों में प्रमुख हैं उनकी प्रथम पत्नी सती का अध्याय..
दक्ष प्रजापति की सबसे छोटी और सबसे लाडली कन्या थी सती।
दक्ष के विरोध को जानते हुए भी सती (दाक्षायणी) ने सदा के संन्यासी - विरक्त शिव से विवाह किया।
हिंदु धर्म में पुत्रियों कल्याण की सोचकर मातापिता अपनी समझ में अच्छा वर अवश्य ढूंढते हैं परंतु कन्याओं को अपने पति को स्वयं चुनने का अधिकार सदा से रहा है।
सती और आगे पार्वती ने शिव को चुना....
सावित्री ने सत्यवान को....
कुंती ने पांडू को....
(वैसे मायकेवालो ने मन के विरुद्ध विवाह थोपना चाहा तब भी जिन कन्याओं में वैसा साहस था उन्होने अपने मनभावन वर को पाया भी हैं जैसे रुक्मिणी ने कृष्ण को और सुभद्रा ने अर्जुन को ! )
हाँ, तो सती की कथा.....
सती ने पिता के विरोध को जानते हुए भी शिवजी से विवाह कर लिया। अतः दक्ष के मन में बेटी और दामाद के लिए रोष ही रहा! उन्होने एक यज्ञ का आयोजन किया परंतु सती और शिव को आमंत्रित नहीं किया।
शिवजी के विरोध के उपरांत भी सती मायके के मोह के कारण पिता के समारोह में गई। पिता ने क्षमा नहीं की थी। उन्होने सती का अपमान किया। दुख से त्याकुल अपमानित सती ने स्वयं को अग्निसात कर लिया।
शिव के गणों ने इसके पश्चात दक्ष से प्रतिशोध भी लिया।
परंतु कहानी यह नहीं हैं !
सती को हाथ मे उठाए शिवजी व्याकुलता से घूम रहे थे जब सती के देह के ५६ टुकडे विभिन्न स्थानों पर गिरे। यहीं शक्तीपीठ हैं !
प्रश्न यह हैं ही नहीं कि शिवजी सती को बचा क्यों नहीं पाए, क्योंकी सती क्या केवल एक देह थी ?
वह तो आदिमाया थी जो एक देह को त्यागकर पुनः पार्वती के रुप में शिवजी की पत्नी बनी !
जो शिवजी अनादी अनंत हैं (जिनका जन्म नही और जिन्हे मृत्यु भी नही ) उनकी पत्नी को एक विशिष्ट नाम के देह के रुप में देखा नहीं जा सकता हैं।
वस्तुतः यह शिवजी के आख्यान का एक महत्वपूर्ण और कोमल पहलु हैं। महत्व इस कारण से की किसी भी मद (गर्व ) के कारण उन्मत्त होनेवाले को शिवजी सहज ही क्षमा नहीं करते (जैसे दक्ष को दंड भुगतना पडा), दंड देने में उनका नाता आडे नहीं आता हैं और कोमल इस कारण से की बाह्यतः संन्यासी का रुप धारण किए हुए शिवजी के अंतःकरण में भी पत्नी के लिए त्याकुल होने की अत्यंत मृदु भावनाएँ है !
रही सती के शरीर के भाग जहाँ गिर गए वहाँ पवित्र स्थान मानने की परंपरा , तो ऐसी पद्धति अनेक धर्मों में हैं , जैसे...
पवित्र बुद्धदेव के दाँत को सहेजकर श्रीलंका के बुद्धविहार में रखा गया हैं......
येशु ख्रिस्त के रुधिर (Blood) से पवित्र कपडे का एक भाग बेल्जियम के Basilica of the Holy Blood में रखा गया हैं ......
हजरतबल दरगाह में पैगंबर मोहम्मद साहब का अति महत्वपूर्ण देहावशेष अर्थात बाल रखा गया हैं....
👆🏼 यह सभी स्थल श्रद्धालुओं के लिए वंदनीय हैं और मानव के इतिहास में धर्मश्रद्धा के उदात्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। ठीक इसी प्रकार आदिमाता के 'सती रुप' के ५६ अवशेषों की कहानी है सती आख्यान ‼️
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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