#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ९ - दि. ०२.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ९ : दि. ०२.०६.२०२३
🚩जय श्रीराम🚩
भगवान श्री महादेव के मूर्त रुप की (जो हमारे नयन उनकी मूर्ति में देखते है ) और उसमें निहित अर्थ / प्रतिकों की चर्चा का प्रारंभ हम कर रहें है ।
वैसे इन आदिदेव का सत्य स्वरूप समझने की क्षमता तो साधु संत और ज्ञानियों में ही हो सकती है 😌
शिवजी ने मस्तक पर गंगा को धारण किया है। वही गंगा जो रघुकुल के राजा भगिरथ के अपार प्रयत्नों से मानवकल्याण के लिए पृथ्वीपर अवतरित हुई ।
परंतु गंगा के प्रवाह का वेग इतना अधिक था की उससे मानवकल्याण के विपरित जीवन विध्वंस का ही डर था ।
गंगा के इस शक्तिशाली प्रवाह को संयमित और नियंत्रित करने के लिए शासक चाहिए जो शिवजी में पाया गया । शिवजी ने गंगा को अपनी जटाओं के माध्यम से पृथ्वीपर आने का आदेश दिया और गंगा वास्तव में जीवनदायिनी बन गई !
यह केवल कहानी नहीं हैं , तथ्य है जिसे सूक्ष्म विचारों से समझना होगा ।
गंगोत्री में गंगा नदी का उगमस्थान देखनेपर विशाल जलप्रवाह की शक्ति का साक्षात्कार होता है।
पानी का वेग कल्याणकारी हो सकता है और विध्वंसक भी... इसलिए गंगा का वेग नियंत्रित करना आवश्यक था ।
शिवजी ने कुछ ऐसा किया (जिसे हम नहीं जानते) जिससे नदी का वेग जनकल्याण की आवश्यकता के अनुरूप कम हो पाया जो !
👆🏼 इस बात से अनेक लोगोंको कष्ट होता हैं और अनेकों का यह आक्षेप भी है कि संपूर्ण और विस्तारपूर्वक नहीं जाननेपर भी हम शिवजी के कार्य को मान्यता देते है ।
वास्तव में इस विश्व में और भी अनेक सचाईयाँ ऐसी है जिनका पूर्ण रुप हम जानतें ही नहीं है , उनके अस्तित्व का हमें आभास मात्र हैं । परंतु हम उनपर विश्वास करते हैं !
ऐसे में , केवल हिंदु धर्म की मान्यताओं के संबध में प्रश्नचिन्ह क्यों हैं इसपर अवश्य विचार करें !
जैसे हमारी ग्रहमाला है - सूर्य और उसकी परिधि में चक्कर काटते हुए अनेक ग्रह है..
हम जानते हैं कि विश्व में ऐसी अनेक ग्रहमालाएँ है। अनेक ग्रहमालाओं से मिलकर आकाशगंगा (Galaxy )बनती है।
विश्व में अनगिनत आकाशगंगाएँ और कृष्णविवर (Black holes 🕳️) है । हमें उनकी विस्तृत जानकारी नहीं है, उन्हे किसी ने नहीं देखा है, फिर भी हम उनका अस्तित्व मानते है, उनके संबंध में तर्क करते है । यद्यपि यह तर्क सत्य है अथवा नहीं इसका प्रमाण (proof) उपलब्ध नहीं हैं ।
ऐसे में शिवजी द्वारा गंगा का प्रवाह नियंत्रित करने के लिए की गई व्यवस्था संबधी तथ्य अथवा प्रमाण का आग्रह क्यों?
मानव के ज्ञान की सीमा / मर्यादा को मानकर विश्व का पालन करनेवाली शक्तियों के कार्यपर विश्वास रखना यही श्रद्धा और भक्ती का प्रमाण हैं !
और ऐसी मान्यताएँ सभी धर्मों में हैं , केवल हिंदु धर्म में नहीं !
यहीं मान्यताएँ सभी धर्मों में श्रद्धा और भक्ति का आधार बनी हुई हैं क्योंकि ऐसे अनुत्तरित प्रश्न ही देवताओं को सामान्य मनुष्यों से उच्च स्थान प्रदान करते है ।
शिवजी के शक्तियों की ,प्रतिकों की चर्चा हम करते रहेंगे ..
गर्व से कहें 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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