#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १२ - दि. ०५.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १२ : दि. ०५.०६. २०२३
🚩जय श्रीराम🚩
शिवजी के रूप के अर्थ पर आ गे विचार करने से पूर्व हमें ईश्वर तत्व संबंधी विचार करना आवश्यक है!
परमपवित्र भगवद्गीता में प्रभु ने मानव शरीर की क्षणभंगुरता के संबध में बताया है।
प्रभु कहते है कि जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्र को त्यागकर नया वस्त्र धारण करता है उसी प्रकार आत्मा पुराने शरीर को त्यागकर नया शरीर धारण करती है।
अर्थात आत्मा का नाश नहीं होता ।
आत्मा की यात्रा तो आगे चलती रहती है, केवल शरीर नष्ट होता है ।
अर्थ यहीं हैं कि शरीर थोडी अवधि के लिए ही है ।
हिंदू धर्म में यह बताया गया हैं कि वस्तुत: देव / ईश्वर / भगवान निर्गुण है, निराकार है, अर्थात सत्व -रज-तम इन तीनो गुणों से रहित है ।
वैसे इन तीनो गुणों की उत्पत्ति ईश्वर से ही है परंतु पानी में रहकर भी सूखे रहनेवाले कमल के पत्ते के समान ईश्वर पर इन गुणों का प्रभाव नहीं होता हैं !
[सत्व (सात्विक )
रज (इच्छाओं के कारण चंचल मन वाला )
तम (तामसी = उग्र / तीव्र भाव रखनेवाला जिसमे नकारात्मक भावों की प्रबलता है ) ]
.... और, ईश्वर निराकार है , ईश्वर का कोई रुप नहीं है, आकार नहीं है, देह नहीं है ..
जब ऐसा है तो देवताओं के विविध रुप क्यों है ?
इसलिए क्योंकि सर्वशक्तिमान ईश्वर को बिना उनके आकार की कल्पना किए उनके एकमेव (निराकार) रुप में भजना - पूजना सामान्य मनुष्य के लिए संभव नहीं है ।
संत - ज्ञानी यह कर सकते है , परंतु हमारे मन पर अज्ञान की परत इतनी मोटी और मजबूत है कि किसी प्रकार का आकार सामने रखे बिना हम भक्ती कर ही नहीं पाएंगे और जब किसी के भी सम्मुख भव्य - उदात्त - स्वार्थहीन - कल्याणकारी आदर्श ना हो, तब ऐसा श्रद्धा और भक्तिरहित मनुष्य स्वार्थप्रेरित दुष्ट विचारों का शिकार बनने लगता है ।
इसिलिए श्रद्धा - भक्तिहीन मनुष्य असुरों के (दुष्ट शक्तियों ) के प्रभाव में सरलता से आ जाता है ।
इस कारण से देवताओं के विविध (मनभावन ) रुप बनाए गए हैं ।
लेकिन शिवजी कहाँ से मनभावन या मनमोहन हुए?
पहनावा क्या हैं ? हिरन की खाल ..
शरीर का रंग नीला और उपर से चिता भस्म का शरीर पर लेप...
अलंकारों के स्थान पर गले में सर्प डाल रखा है...
बालों का एक जैसा तैसा जूडा जिसमें से बहता पानी, गंगा ही कहे कोई, लेकिन है तो पानी...
वाहन क्या तो बैल, एक बुद्धिहीन अनाकर्षक प्राणी...
और शिव के गण (सेना )भी उन्ही के समान विचित्र यानि भूत - प्रेत - बेताल ..
👆🏼 क्या यह का ईश्वर का रुप हैं ?
है !!!
कैसे, इसकी चर्चा हम करते रहेंगे ।
गर्व से कहें👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय🇮🇳
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