#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ३९ - दि. ०२.०७.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग ३९: दि. ०२.०७.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

हमारा विषय हैं रामचरित्र ! 
परंतु हम चर्चा कर रहें हैं पुरुषप्रधान संस्कृति के कारण विश्व में स्त्रियों पर हुए अन्याय की !
क्यों ? 
क्योंकि हमारा उद्देश हैं हमारे धर्म को समझना, उसका अभ्यास करना ।
धर्म यह किसी चौखट में सजाकर दीवार पर टाँगने के वस्तु नहीं हैं। क्योंकि धर्म का, अर्थात सभी धर्मों का तानाबाना ही मानव जीवन के साथ ही बुना हुआ हैं। इसलिए तत्कालीन समाज के आदर्श, मूल्य इनका प्रतिबिंब उस धर्म के अनुयायीयों के व्यवहार में पाया जाना स्वाभाविक हैं। हमारे अवतारों के व्यवहार में भी ! क्योंकि मानव शरीर धारण कर भगवान जब जब पृथ्वी पर अवतरित हुए हैं, उन्होने मानव सभ्यता के मर्यादाओं का भरसक पालन ही किया है। 
अत्यावश्यक होनेपर ही उन्होने तत्कालीन पद्धतियों के विपरीत व्यवहार किया है। 
समाज में परिवर्तन एक ही पिढी में नहीं होता हैं। किसी का उद्देश यदि दीपस्तंभ बनकर अन्यों को मार्गदर्शन करना है तब सामान्य जन के मन में आदर व सम्मान अर्जित करना आवश्यक हो जाता है। समाज की हर प्रथा - पद्धति को ताक पर रखने से यह करना संभव नहीं हो सकता। इसी कारण भगवान भी इन मान्यताओं के अनुरूप आचरण करने पर विवश होते है। परंतु ऐसे आचरण से वह अपने व्यक्तिगत जीवन के सुखों का बलिदान भले ही करते हो, समाज के हित की हानी नहीं होने देते यह जानना महत्वपूर्ण हैं !
रही बात पुरुषप्रधान संस्कृति में स्त्रियों पर अत्याचार की (जिसके लिए माता सीता की अग्निपरीक्षा व श्रीराम द्वारा सीतात्याग के उदाहरण कुत्सित बुद्धी से दिए जाते हैं) तो हम हिंदुओं को भी औरों को दर्पण दिखाने का ज्ञान व साहस होना चाहिए !
कौन ढोल बजा रहा हैं हिंदु देवताओं द्वारा स्त्रियों पर अन्याय की ? हम तो फिर भी इतिहास ही बता रहें हैं, परंतु महिलाओं पर अन्याय के वर्तमानकाल के कितने ही उदाहरण (वह भी उच्चशिक्षित वर्ग में!) गिना देते हैं हम 👇🏼

विश्व के अनेक देशों में अभी भी राजसत्ता हैं, इग्लैंड के समान .. इनमें से अनेक देशों में यह नियम था की घर का बेटा राजा बनेगा  (उम्र से कनिष्ठ होने पर भी, अर्थात राजा की ज्येष्ठ पुत्री को राज्य नहीं सौंपा जाता)।
उदाहरण : 
डेन्मार्क में पहली पिढी हैं जहाँ रानी हैं।
स्वीडन, नॉर्वे व स्पेन में आनेवाली पिढी में पहली बार रानी बनेगी ।
मोनॅको व जापान में अब भी घर का बेटा ही राजा बननेवाले हैं यद्यपि उनकी बहने उनसे आयु में ज्येष्ठ हैं ।
मध्यपूर्व के देशों में तो बेटियों द्वारा राज करने की पद्धति नहीं ही है।
इंग्लैंड में युवराज्ञी को अधिकृत रुप से उसके अपने नाम से नहीं, उसके पति के नाम से पुकारा जाता हैं, जैसे प्रिसेंस कॅथरीन नहीं कहेंगे, वे उन्हे प्रिसेंस विल्यम के नाम से जानते हैं।
भारत में हिंदु विवाह कानून के अंतर्गत पुरुषों को एक ही विवाह की अनुमति हैं परंतु आज भी विश्व के अनेक भागों में बहुपत्नीत्व का चलन को कानूनी मान्यता हैं जो अफ्रिका के वन्य टोलियों में हैं व विश्व के सुशिक्षित व प्रगत देशों में भी !

यानि ये लोग, जिनके अपने घर में, समाज में महिलाओं के सम्मान पर आज भी प्रश्चचिन्ह हैं वे हमारे श्रीरामजी के मर्यादा उल्लंघन की बात कहकर चिढाएंगे ?

हमें ना तो आक्रमक होना हैं, ना ही समाज की शांति भंग करनी हैं, ना ही दूसरे धर्मों पर उँगली उठानी हैं, वे अपने घर अपनी पद्धति से संभालते रहे, हमे टिप्पणी करने का ना तो अधिकार हैं, ना ही आवश्यकता ! 

परंतु हिंदु धर्म के इतिहास और वर्तमान को लेकर यदि कोई अभ्रद्र टिप्पणी करता हैं तो उसका उचित उतर देने के लिए इन सब का 👆🏼ज्ञान आवश्यक है ! 

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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