#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ३६ - दि. २९.०६.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग ३६ : दि. २९ .०६.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

देवशयनी आषाढ एकादशी के दिन भगवान श्री पांडुरंग को कोटी कोटी वंदन 🙏🏼

हिंदु देवताओं के आख्यानों में आगे बढने से पूर्व हम हिंदु धर्म में निहित वैज्ञानिक तत्वों पर चर्चा करेंगे । वास्तव में धर्म और विज्ञान (विशेषकर हिंदु धर्म और विज्ञान) यह अद्‌भुत जोडी हैं।

हिंदु धर्म में - या यूँ कहिए की प्रत्येक धर्म में - दो भाग होते हैं, शास्त्र व प्रथा-परंपराएँ। अर्थात धर्म के एक भाग को शब्दों से बांध दिया गया होता हैं जो या तो अपरिवर्तनीय हैं अथवा जिसमें परिवर्तन के लिए विशिष्ट नियमों के पालन का बंधन होता हैं! 
हम दोनों पर भी विचार करेंगे ।

प्रारंभ हम कर रहें हैं भगवान श्री विष्णु के दशावतारों से। यह अवतार हैं, मत्स्य - कूर्म - वराह - नारसिंह - वामन - परशुराम - श्रीराम - श्रीकृष्ण - बुद्ध व (आगामी) कल्की ।

हमने कदाचित ही कभी इन अवतारों में निहित वैज्ञानिकता पर सोचा हैं !
सभी जानते हैं तथा विज्ञान की भी मान्यता हैं कि पृथ्वी पर जीवसृष्टी का उद्गम पानी में हुआ हैं। प्रथम जलचर (पानी में रहनेवाले जीव ) उसके पश्चात उभयचर (पानी व भूमि दोनो में विचरण करनेवाले जीव) व भूचर (भूमि पर रहनेवाले जीव) यह पृथ्वीपर जीवसृष्टी की निर्मिती का क्रम रहा हैं।
इस वैज्ञानिक सत्य के आलोक में हिंदु दशावतारों पर विचार करें 👇🏼

१) मत्स्य (मछली) = जलचर
२) कूर्म (कछुआ) = उभयचर
३) वराह (सुअर ) = भूचर
४) वामन = असुरों की सत्ता से पृथ्वी को मुक्त करने के लिए अवतार अर्थात जब जीवसृष्टी में स्थिरता आ गई हैं तब मानववंश को सुरों के ( धर्म व न्यायसंगत व्यवस्था) के आधिपत्य में रहने की व्यवस्था करना
५) नरसिंह = विचित्र रुप जो अत्याचारियों की मृत्यु के लिए ही अवतरित हुआ है। वर्तमान काल के हिरण्यकश्यपु राक्षस तो आतंकवादी हैं, भगवान ने उनके पारिपत्य का निःसंदेह एक ही मार्ग बताया है, हत्यारे की मृत्यु !
६) परशुराम = जैसी हमने चर्चा की थी की मानवों के रक्षण के लिए क्षात्रतेज आवश्यक हैं ! अत्याचारियों के सम्मुख शांतिपाठ करना व्यर्थ है , उनका दमन करना ही आवश्यक हैं ! परशुराम क्षात्रतेज का प्रतिक हैं, जन्म से ब्राह्मण हैं किंतु वे क्षत्रियों के गुरु रहे हैं ! 
परशुराम कथा भी हिंदु धर्म से जुडी कई भ्रांतियाँ दूर करती हैं । स्वयं ऋषिकुल से अर्थात ब्राह्मण होनेपर भी वे युद्धकला में निपुण थे। क्षत्रिय राजकुमारों को अस्त्र - शस्त्र संचालन की विद्या का दान करते थे । सारांश ब्राह्मण मात्र पोथीपंडित नहीं थे व नहीं होने चाहिए, ब्राह्मण 'ज्ञानवंत' का पर्यायवाची शब्द (Synonym) हैं ।
इनके संबध में मान्यता हैं कि इन्होने २१ बार पृथ्वी निःक्षत्रिय की थी अर्थात एक भी क्षत्रिय पृथ्वीपर ना जिवित रहे ऐसा घोर पराक्रम २१ बार किया ।
आश्चर्य ?
जब पृथ्वी से सारे क्षत्रिय नष्ट ही हो गए तो क्षत्रियों की अगली पिढी कैसे उत्पन्न हुई ?
क्योंकि हिंदु धर्म जन्म पर आधारित वर्णव्यवस्था को नहीं मानता हैं ! प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्म के अनुसार वर्ण पाता हैं । उदाहरण हमने पहले भी देखे थे, क्षत्रिय राजा विश्वामित्र ब्रह्मर्षी विश्वामित्र बने थे व लुटेरे वाल्या ने ज्ञानप्राप्ती कर ऋषि वाल्मिकी के रुप में जीवन का नया अध्याय प्रारंभ किया , राजकन्या लोपामुद्रा ऋषि अगस्त्य से विवाह के पश्चात ऋषिकुल में आकर कुलमर्यादा के अनुरूप ज्ञानवती / ज्ञानदात्री बन गई ! 
परशुराम द्वारा क्षत्रियों का विनाश किया गया क्योंकि क्षत्रिय उन्मत्त हो गए थे, अन्यायी हो चले थे इसलिए उनका मद (गर्व / अहंकार ) नष्ट करने के लिए क्षत्रियसंहार किया गया। पुनः कोई नया व्यक्ती क्षात्रधर्म अपनाकर क्षत्रिय बन जाता था व काल के प्रभाव से उसके भी दमन की आवश्यकता होने लगती थी ।
७) श्रीराम
८) श्रीकृष्ण 
इन दो अवतारों पर क्या कहें ! मानव की वाणी भगवान के इन अवतारोंका गुणगान ही कर सकती है, वर्णन नहीं !
९) बुद्ध - सांसारिक दुःख , त्रासदी से मुक्ति व मानवजीवन को शांति के मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन के लिए यह अवतार हुआ है। मानव की उत्क्रांति की गाथा में अत्यंत प्रासंगिक ! जीवसृष्टी की गाथा में किसी ना किसी मोड पर मनुष्य को अत्याचार - हिंसा को पीछे छोड देना चाहिए व शांति - प्रेम - अहिंसा के मार्ग पर चलना अत्यावश्यक हैं यह इस अवतार का संदेश हैं।

आगे हम हमारी प्रथा - परंपराओं में निहित विज्ञान को भी समझने का यत्न करेंगे।
गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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