#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग २७ - दि. २०.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग २७ : दि. २०.०६.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
हिंदु धर्म की विदुषियों को नमन की श्रृंखला में पुनः आपका स्वागत हैं।
पुरातन गुरुकुलों के विषय में हम जानते ही है। कुलगुरु ऋषि जैसे वसिष्ठ, पाराशर, सांदिपनि आदियों के विषय में भी बहुत कुछ चर्चा की जाती है। परंतु प्रायः ऋषि पत्नियों के संबध मे अधिक जानकारी नहीं होती है।
आज हम पण्डिता ऋषिपत्नीयों की चर्चा करेंगे।
प्रथम नमन ऋषि अगस्त्य की पत्नी देवी लोपामुद्रा को 🙏🏼 !
वे अत्यंत रुपवती तथा बुद्धीमान स्त्री थी। विदर्भ के राजा की पालिता (adopted) कन्या जिन्होने स्वयं ऋषि के विवाह प्रस्ताव को स्वीकारने के लिए पिता को मनाया। राजवैभव को त्यागकर उन्होने ऋषि की साधारणसी गृहस्थी को स्वीकार किया।
ऋषि अगस्त्य का उद्देश था ज्ञानप्राप्ति, ज्ञानवर्धन और ज्ञानदान। उन्हे सांसारिक सुखों में वैसी रुचि नहीं थी।
उनकी अलिप्तता और निर्मोह पर पत्नी लोपामुद्रा ने उपाय किया।
लोपामुद्रा स्वयं ब्रह्मवादिनी थी। ऋग्वेद की कुछ ऋचाओं की रचना देवी लोपामुद्रा ने की हैं।
वे स्वयं बुद्धिमान, ज्ञानवती तथा धर्मकर्तव्यों के प्रति भी सजग थी।
वे धर्म की मर्यादाओं के अनुरूप गृहस्थाश्रम में रुचि रखती थी। उन्होने ऋषि अगस्त्य को पवित्र ज्ञानमार्ग के साथ समाजऋण (अर्थात गृहस्थजीवन तथा प्रजोत्पादन) की ओर उन्मुख किया।
वास्तव में देवी लोपामुद्रा का यह अमूल्य योगदान है कि उन्होने जीवन में भावनाओं के संतुलन को अधोरेखित किया।
विरक्ती अंगिकार करना यही समाज का कल्याण करने का एकमात्र मार्ग नहीं हैं, गृहस्थाश्रम में रहकर भी समाज के हित में कार्य किया जा सकता है यह इस दंपति ने स्वयं के उदाहरण से स्पष्ट किया !
हिंदु धर्म का वही शाश्वत तत्व 👉🏼 गृहस्थजीवन के भोगों का दास नहीं बनना है, उनपर नियंत्रण रखकर उनका अपनी इच्छा से उपयोग करना है।
आज की श्रृंखला का दूसरा पुष्प हैं वसिष्ठपत्नी देवी अरुंधती (रघुकुल अर्थात प्रभु राम के ईक्ष्वाकु कुल के गुरु ऋषि वसिष्ठ!)।
ऋषि मेधातिथि और अप्सरा उर्वशी की कन्या अरुंधती ! (अप्सराओं की भूमिका पर आगे विचार अवश्य करेंगे)
अरुंधती को सावित्री देवी ने शिष्या के रुप में स्वीकार किया। वे समकालीन विदुषियों जैसे बहुलादेवी, गायत्रीदेवी, सरस्वतीदेवी आदि के साथ विद्वत्चर्चा में अरुंधती को साथ रखती थी।
सात वर्षों तक विद्याग्रहण के पश्चात सावित्रीदेवी की सूचनानुसार अरुंधती का विवाह युवा वसिष्ठ के साथ हुआ।
अरुंधती मात्र गृहिणी नहीं थी। वह भी विदुषी थी। सूर्यदेव, इंद्रदेव व अग्निदेव के साथ उनकी धर्मचर्चा का वर्णन विख्यात है।
यह उदाहरण हिंदु धर्म में स्त्रियों का स्थान और हिंदु समाज की उन्नति में स्त्रियों का योगदान इन महत्वपूर्ण मुद्दों को स्वयं स्पष्ट करते हैं।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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