#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ७७ - दि. ०९.०८.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ७७ : दि. ०९.०८.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
हम यही सुनते - पढते आए हैं कि कृष्णजन्म के समय देवकी के आसपास सभी सेवक - सेविकाएँ - सैनिक प्रगाढ निद्रा के प्रभाव में थे।
वसुदेव ने बेंत टोकरी में नन्हे कृष्ण को रखा और भलीभाँति ढक दिया। वर्षा की संततधार थी। किसी का उनपर ध्यान न था। वह मथुरा नगरी से निकलकर यमुना तट पर पहुँचे। नन्हे बच्चे की टोकरी मस्तक पर रख उन्होने उफनती यमुना पार कर ली.....
इस आख्यानपर विचार करने पर अनेक संभावनाएँ दिखती हैं।
जैसे हमने पहले ही देखा था, वसुदेव - देवकी के ऋजुतापूर्ण व्यवहार ने उनके सेवक - सेविकाओं का मन मोह लिया होगा....
कंस के हाथो अपने पुत्रों को निर्मम मृत्यु मिलनेपर भी ईश्वरपर श्रद्धा रखकर धैर्यपूर्वक जीवनयापन करनेवाले इस दंपति के लिए उनके मन में सद्भावना उत्पन्न हुई होगी....
सोलहवी सदी में पन्ना धाय ने राणा उदयसिंह को हत्यारों से बचाने के लिए अपने बच्चे को ही उदयसिंह बताकर हत्यारों के सम्मुख प्रस्तुत किया था। और माँ होकर भी उसकी क्रूर हत्या की साक्षी बनने का दुर्भाग्य उन्होने सहन किया था।
एक धेय्य से प्रेरित होनेपर सामान्य जन भी ऐसा असामान्य कार्य कर देते हैं।
कृष्ण के संबध में भी ऐसी संभावना हो सकती हैं।
यद्यपि सभी सेवक - सेविकाएँ व देवकी की धाय (midwife) कंस के क्रोध से परिचित थे और वसुदेव - देवकी से सहानुभूति रखने का और उनकी सहायता करने का परिणाम भी जानते होंगे, परंतु उन्होने भी कंस से छुपाकर इस अभागे दंपति का साथ देने का निर्णय लिया हो सकता हैं।
अतिभयंकर वर्षा और विद्युल्लता के तांडव के कारण कदाचित देवकी का प्रसववेदना से कराहना व नवजात शिशु के रोने की आवाज सैनिकों तक ना पहुँची हो....
अथवा सेवक - सेविकाओं ने उनका ध्यान दूसरी ओर आकर्षित करने की युक्ति की हो सकती हैं....
अथवा उन्हें कुछ समय के लिए निद्राधीन कराने के लिए वैसा कोई उपाय किया गया हो सकता हैं....
अथवा प्रकृति (nature) के ऐसे तांडव के चलते वसुदेव निवासस्थान से बाहर नहीं निकल सकते ऐसी कल्पना कर सैनिक असावधान रहे होंगे....
.... संभावनाएँ अनंत हैं क्योंकि हरी अनंत, हरीकथा अनंत यही सत्य हैं !
नवजात शिशु को टोकरी में रखकर जहाँ यातायात (traffic) कम हो ऐसे मार्ग से वसुदेव यमुना नदी की दिशा में चल दिए होंगे।
वसुदेव मथुरा नगरी के रहनेवाले थे। यमुना नदी से भलीभाँति परिचित थे। तैरने - खेलने वे नदी पर जाते ही होंगे। और गोकुल में अपने मित्र नंद से मिलने भी तो जाते होंगे।
यमुना का बहाव (flow) और उसे पार करने का सुरक्षित स्थान वे अवश्य जानते होंगे।
अपने सद्यजात शिशु को बाढ से उफनती यमुना के मार्ग से गोकुल में सुरक्षित पहुँचाने का मार्ग उन्होने अवश्य सोच रखा होगा।
कृष्णजन्म के आख्यान से अभिभूत होने का क्रम जारी रहेगा....
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें