#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ३५ - दि. २८.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ३५: दि. २८.०६.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
श्री दुर्गा सप्तशती के अंतिम चरण में कहना ना होगा कि महादैत्य शुंभ व निशुंभ के वध का वर्णन हैं ।
इसमें देवी द्वारा उपयोग किए गए विविध अस्त्र - शस्त्र, देवी के विविध रूपों के वाहन व उनकी युद्धसज्जता आदि का रोमांचित करनेवाला वर्णन हैं, देवी का तेजःपुंज रुप व देवी के दुर्लभ अलंकारों का सुंदर वर्णन हैं !
यदि अबतक आपको यह पढने का सौभाग्य प्राप्त ना हुआ हो , तो अवश्य पढे । सार्थ सप्तशती भी उपलब्ध हैं । संस्कृत श्लोक व नीचे अर्थ इस प्रकार के ग्रंथ में अर्थ तो अवश्य पढ़े ही !
अपनी क्षमताभर देवी के विविध आख्यानों का वर्णन हम कर सकते है किंतु देवी माँ का कोमल व रौद्र, ममतामयी व प्रचंड, नयनसुखद व विकराल रुप यथार्थ शब्दों में बाँधना संभव नहीं है !
देवी द्वारा शुंभराक्षस के साथ किए गए बाहुयुद्ध के पश्चात देवी माँ ने उसे उठाकर घुमाया व भूमिपर पटक दिया इस घटना को हम मन की आँखों से देख सकते हैं किंतु माता के इस विकट होने के कारण मनोहारी हुए रुप का वर्णन कोई कैसे कर सकता हैं !
स्वयं पढेंगे तो देवी माँ के असीमित रूप की कल्पना करना संभव होगा, मेरे शब्द वास्तव में अपूर्ण हैं !
हम हिंदु हैं , हमारे घर में श्रीमद्भगवद्गीता, श्री दुर्गा सप्तशती, श्रीरामायण, श्री भागवत होने चाहिए, हमे उन्हे पढना चाहिए, श्री रामरक्षा , श्री हनुमानचालिसा, तुलसीरामायण की चौपाइयाँ, श्री अथर्वशीर्ष, श्री पुरुषसूक्त, श्रीसूक्त आदि हमे कंठस्थ होना चाहिए !
साथ ही आदि शंकराचार्य रचित भज गोविन्दम, मधुराष्टक, श्री नर्मदाष्टक, श्री गणेश पंचरत्नम आदि स्त्रोत्र बहुत दीर्घ नही हैं, कंठस्थ किए जा सकते हैं । You Tube पर भी यह सब उपलब्ध हैं, उसे तो सुना जा ही सकता हैं ❗
और भगवद्गीता ! भगवान के उपदेश का प्रत्येक शब्द जीवन संबधी साक्षात्कार से कम नहीं , प्रत्येक हिंदु का कर्तव्य हैं कि गीता कंठस्थ करे । प्रारंभ तो करे, अपने जीवनकाल में जितना ही कर पाए, प्रभु के शब्दों के आधार पर यह भवसागर पार तो हो ही जाएगा 🙏🏼
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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