#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ४६- दि. ०९.०७.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ४६ : दि. ०९ .०७ .२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

निबिड - गहन वनों में विचरण कर श्रीरामजी ने क्या साध्य किया यह समझने के लिए वनवासकाल में प्रभु द्वारा विचरण किए गए क्षेत्र की व्यापकता समझनी होगी। 
उनके द्वारा वनवास काल में भ्रमण किए गए क्षेत्र को हम भारत के मानचित्र (Map) के माध्यम से भी देख सकते हैं (हम इसपर कल विचार करेंगे)।

...हमें यह भी समझना हैं कि यह संपूर्ण यात्रा पत्नी सीता व भ्राता लक्ष्मण के साथ की गई पदयात्रा हैं ! 
कोई साधन नहीं, कोई वाहन भी नहीं ! 
धनुष्यबाण व शस्त्र बनाने की साधारण सामग्री / औजार लेकर की गई पदयात्रा !
और यह यात्रा कौन कर रहे हैं ?
शक्तिशाली अयोध्या के दो राजकुमार व मिथिला के संपन्न राजगृह में पोषित राजकुमारी !

परंतु, उस युग में अधिकांश राजकुलों में क्षत्रिय राजकुमारों को सुखासीन - भोगविलास युक्त जीवन के लिए आयु का एक पडाव पार करना आवश्यक हुआ करता था। 
आयु के साधारणतः आठ दस वर्ष से आगे अनेक वर्षों तक वे गुरुकुल में सामान्य छात्र के समान रहकर वे कठोर ज्ञानसाधना करते थे अथवा राजमहल में रहते हुए भी शिक्षा की अवधि में उनके लिए व्रतस्थ जीवन का नियम होता था (यह नियम तोडने पर हुए परिणामों पर हम महाभारत पर चर्चा के समय विचार करेंगे)।

विद्याभ्यास काल में कठोर अनुशासित जीवन के अतिरिक्त रामलक्ष्मण के जीवन में एक और सुयोग भी आया था ! अयोध्या के इन राजकुमारों को राक्षसों के निर्दालन के लिए ब्रह्मर्षि विश्वामित्र युवावस्था की प्रारंभिक अवस्था में ही वन में ले गए थे। इस कारण उनके लिए वनभ्रमण कठिन आव्हान नहीं रहा होगा।  तपोनिष्ठ ऋषि विश्वामित्र के साथ वनविचरण के उस सुंदर अनुभव का स्मरण ही रामलक्ष्मण ने अपने वनवास काल में किया होगा  ! 

...और गुरु भी कितने महान, जो कभी कान्यकुब्ज के राजा रहे थे! अपने सैन्यबल का उपयोग कर मुनी वसिष्ठ व पत्नी अरुंधती के आश्रम से  कामधेनु चुराने के असफल प्रयास के बाद उन्होने जीवन का अर्थ समझने के लिए संन्यास लिया और वे राजा कौशिक से मुनि विश्वामित्र बन गए । उसके पश्चात ज्ञानप्राप्ती कर वे क्षत्रिय से ब्राह्मण व आगे चलकर ब्रह्मर्षि बने !

संवेदनशील आयु में जिन्हे ऐसी सत्संगति का लाभ होता हैं उनके लिए वनवास कष्ट नहीं, दिव्य अनुभूतिपूर्ण सुयोग होता हैं!
रामचरित्र का दिव्य आख्यान क्रमशः आगे बढेगा....

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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