#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ६८ - दि. ३१.०७.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ६८ : दि. ३१.०७.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

भगवान श्रीराम के आख्यान के पश्चात मन में स्वाभाविक रूप से श्रीकृष्ण आख्यान आता हैं इसलिए हम अब वही प्रारंभ करेंगें।

परंतु कृष्णाख्यान की विशेषता यह हैं कि इसका पट अथवा रंगमंच अतिविशाल हैं।
श्री गणेश पुराण, श्री विष्णु पुराण आदि विविध पुराणों में उन देवताओं के आख्यान हैं। परंतु वह सब आख्यान उस विशिष्ट देवता के ही हैं। 

अन्य देवताओं के आख्यान में भी दूसरे देवताओं का उल्लेख पाया जाता हैं जैसे शिवजी का उल्लेख रामायण में है। परंतु रामायण यह शिवजी का आख्यान नहीं हैं, श्रीराम का ही है!

श्रीकृष्ण के संदर्भ में परिस्थिती भिन्न हैं। यद्यपि श्रीमद् भागवत पूर्णतः श्रीकृष्ण की गाथा है, परंतु इसमे में उनकी विचारधारा का प्रतिबिंब मात्र उन्हीं की कृति अथवा कर्म के संदर्भ में आती हैं जो स्वाभाविक है। 

परंतु इसके अतिरिक्त कृष्ण द्वारा भारत के इतिहास को विशिष्ट दिशा देने का अध्याय हैं महाभारत!

पांडवो के उदय के पश्चात महाभारत के अतिविशाल पट पर श्रीकृष्ण यह नाम प्रत्येक पृष्ठ पर अंकित हैं। पांडवों का इतिहास कृष्ण के बिना असंभव है। 
इसलिए कृष्णचरित्र को समझने के लिए और उनके उपदेशों को आत्मसात करने के लिए महाभारत पर विचार अवश्यंभावी है।

यद्यपि कृष्ण का अस्तित्व पांडवों के संदर्भ के अतिरिक्त भी है परंतु पांडवों का अस्तित्व कृष्ण के उल्लेख के अभाव में अर्थहीन हैं। और श्रीमद्भगवद्गीता के बिना तो कृष्णकथा पूर्ण हो हो नहीं सकती हैं। फिर गीता समझने के लिए महाभारत की परिस्थितियाँ अथवा उसके अनेक प्रसंग उपयुक्त हैं।
साथ ही कौरवों के पक्ष के अनेक वीर / ज्ञानी जैसे पितामह भीष्म, महात्मा विदुर आदि का भी कृष्ण के प्रति आदर - भक्तिभाव प्रकट करनेवाले अनेक प्रसंग इसमें हैं। 
अतः कृष्णचरित्र के संदर्भ में महाभारत को भी देखना आवश्यक हैं। 

कृष्ण के व्यक्तित्व को, उनके उपदेश को समझना वास्तव में शिवधनुष्य उठाने का प्रयत्न हैं। परंतु इस शिवधनुष्य के केवल दर्शनमात्र से भी हमारी बुद्धी व मन ज्ञान व सुविचारों से प्रकाशित हो पाएगा इसी विश्वास से हम यह यात्रा आरंभ करेंगे 🙏🏼।

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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