#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ८० - दि. १२.०८.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ८० : दि. १२.०८.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
श्रावण वद्य अष्टमी की स्याह काली रात में पुनः यमुना पार कर वसुदेव आपने निवासस्थान पहुँचे।
सबकुछ वैसा ही था जैसे थोडे समय पहले वह छोड आए थे।
वर्षा, मेघों का गरजना और बिजली कडकने की भयावह ध्वनियों में मथुरा नगरी सो रही थी....
नगरद्वार पर तैनात सैनिकोने चौकियों को शरण ली थी....
पथों पर मनुष्य तो थे ही नहीं,
प्राणी भी सुरक्षित स्थान के आसरे में दुबके बैठे थे....
वसुदेव के निवास पर तैनात सैनिक अभी भी निश्चिंत होकर आराम कर रहे थे।
दबे पाँव पिछले द्वार से वसुदेव अंदर आए। धाय और सेविका दोनो आशंकित सी उनकी प्रतिक्षा कर ही रही थी। आगे बढकर उन्होने टोकरी थाम ली।
परंतु टोकरी हाथ में लेते ही दोनो समझ गई कि वह रिक्त (empty) नहीं थी ।
उपरी आवरण हटाते ही उसमे लेटे एक नन्हे से शिशु ने उन्हें चौंका दिया।
ऐसा सद्यजात शिशु वसुदेव को मिलने की घटना से दोनो चकित थी।
वसुदेव ने उसे देवकी के पास लिटाने को कहा।
बच्चे को सुखे कपडे में लपेटते समय दोनो देखा की वह कन्या थी !
अब ?
उन्होने प्रश्नार्थक दृष्टी से वसुदेव को देखा।
अबतक के श्रम और तनाव से वसुदेव को निढाल होना चहिए था। परंतु इस नाटक के सूत्रधार होने कारण वह सावधचित्त थे। उन्होने धाय और सेविका को नाटक के अगले प्रवेश संबंधी सूचनाएँ दी।
देवकी को प्रातः कन्या जन्म की सूचना मिली।
वह चकित थी। इसी आठवी संतान को कंस का काल बनना था। इसलिए उसे पराक्रमी पुत्र की अपेक्षा थी।
परंतु यह तो कन्या थी।
क्या यह ईश्वरी वाणी का दायित्व पूर्ण कर पाएगी ?
पत्नी की भ्रांति को वसुदेव समझ रहे थे। परंतु उन्होने उसे कुछ नही बताया।
प्रसव के पश्चात थकान और अजन्मे बच्चे के हत्या का भय से देवकी शुद्ध खो बैठी थी। वसुदेव का गोकुल जाना और लौटना इसका उसे आभास नहीं हुआ था। इसलिए शुद्ध लौटते ही उसे कन्याजन्म की सूचना मिलने पर वह चकित रह गई।
देवकी के मन में कदाचित एक क्षीण सी आशा जागी होगी की कदाचित कंस उस कन्या की हत्या नहीं करेगा।
द्वापारयुग के उस कालखंड में लोकोत्तर, पराक्रमी, कर्तत्ववान स्त्रियों का उल्लेख प्रायः नहीं पाया जाता हैं। स्त्रियों का पुरुषो पर निर्भर रहना समाजमान्य था।
इसलिए, कन्या से मृत्यु भय ना होने की सोचकर कंस उसे जिवित रहने देगा यह आशा देवकी के मन में अंकुरित हुई होगी।
परंतु कृष्णजन्म का नाट्य अभी अपने शीर्ष बिंदु पर था।
जहाँ गोकुल में यशोदा की प्रसूति पश्चात नाटक का प्रवेश अंतिम चरण में था वहीं मथुरा में एक और रहस्योद्धाटन से इस नाट्य में नया मोड आनेवाला था ..
हम इस आख्यान पर मनन करते रहेंगे 🙏🏼
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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