#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ५०- दि. १३.०७.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ५० : दि. १३.०७.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
वनवासकाल में प्रभु का जीवन सादगीपूर्ण था। वस्त्राभरणों की उपाधि नहीं थी। गृहस्थजीवन ना होने के कारण माता की नियमित रसोई नहीं हुआ करती थी व वन में मिलनेवाले खाद्यवस्तुओं से ही जीवनयापन हो जाता था।
बताया जाता हैं कि वन में सुवर्ण समान कांतिमान हिरण देखकर सीताजी ने पति से आग्रह किया कि वे वस्त्र बनाने के लिए उस हिरण की खाल लाकर दे।
सीताजी की रक्षा के लिए भ्राता लक्ष्मण को आदेश देकर प्रभु हिरण के पीछे चल पडे । मायावी असुर मारीच ने हिरण का रुप धारण किया था । उसने श्रीरामजी की आवाज मे लक्ष्मण को सहायता के लिए बुलाया। देवर को आग्रहपूर्वक अथवा निर्भत्सना कर सीताजी ने राम रक्षण के लिए भेजा और स्वयं राक्षसराज रावण द्वारा अपहृत कर ली गई !
यहाँ से रामकथा ने एक नया मोड लिया।
👆🏼 किंतु इस सारे कथाभाग में प्रश्न ही प्रश्न हैं और भ्रांतियाँ भी !
राजकुलवधु होने के नाते, पति के वनवास काल में
अयोध्या में सुखासीन जीवन जीने का पर्याय सीताजी के लिए उपलब्ध था।
नम्रता से अनुमति मांगती तो कदाचित इस अवधि के लिए मायके जाना भी सुलभ हो सकता था ! सारांश महलों में रहकर सादगी से जीती तब भी पतिव्रता कहलाकर आदर व सम्मान की अधिकारिणी हो सकती थी।
परंतु सीताजी ने पति की अनुगामिनी बनकर वनवास का पर्याय स्वीकार किया।
उनके लिए वस्त्र व अलंकार धारण करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था, किंतु उन्होने पति के समान ही वल्कल धारण कर लिए।
सादगी और कैसे होती हैं?
जिस स्त्री ने इतनी सहजता से वस्त्र अलंकार का त्याग कर वनवास के कष्ट स्वीकार कर लिए उसके लिए सुवर्णकांती का हिरण इतना महत्वपूर्ण हो जाएगा की वह अपने प्रिय पति को घने जंगल में उस हिरण के पिछे दौडा देगी ❓
रामायण की सीता क्या अपने पति का पराक्रम नहीं जानती थी, जो प्रभु पर संकट की आशंका से देवर लक्ष्मण को उनकी सहायता के लिए भेजने के लिए इतनी विचित्र परिस्थिती निर्माण करेगी ❓
... जिस देवर ने बडी भावज को सदैव आदर - सम्मान दिया था, छोटे भाई समान निश्छल प्रेम दिया था उसकी निर्भत्सना कर वह उसे भी घने जंगल में भेज देगी❓
नाटक को आगे बढाने के लिए विविध प्रवेश आवश्यक होते हैं। ठीक उसी प्रकार, श्रीराम द्वारा राक्षसों के सर्वोच्च शक्तिस्त्रोत के निर्दालन का निमित्त बनाने के लिए लिखा गया यह प्रवेश था !
रामकथा के विविध पहलुओं पर विचारविमर्श क्रमशः चलता रहेगा.....
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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