#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ४१ - दि. ०४.०७.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग ४१ : दि. ०४.०७.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

श्रीराम को हम विष्णु अवतार मानते हैं। अर्थात, भगवान विष्णु मानवरुप में अवतरित हुए थे। यद्यपि उनका जीवनचरित्र महर्षी वाल्मिकी द्वारा महाकाव्य के रुप में लिखा गया हैं, किंतु यह मात्र काव्य नहीं हैं, यह श्रीरामजीका इतिहास हैं ! 

जैसा की हम जानते हैं, इतिहास स्थूल रूप से लिखा जाता हैं। इसमें घटनाओं का, विविध प्रसगों का वर्णन होता हैं किंतु उनके पार्श्व में जो विचारप्रक्रिया चलती हैं, इतिहास के विविध पात्र जो व्यूहरचना करते हैं इनका वर्णन संभव नहीं होता हैं। 

इतिहास के अनेक भागों को हमें तर्क के आधार पर ही समझना होता हैं। सारांश, इतिहास विशाल Jigsaw puzzle जैसा होता हैं व विविध टुकडों को जोडनेपर अनेक घटना - प्रसंग - व्यक्तीरेखाएं उनके वास्तविक अर्थ में उभरकर आती हैं !

यद्यपि तुलनात्मक रूप से आधुनिक काल के इतिहास का अभ्यास इसी धोरण से किया जाता हैं, किंतु हमारे इतने प्राचीन इतिहास को हमने इस दृष्टी से कभी देखा ही नहीं हैं ! 
इसी कारण हम श्रीराम - श्रीकृष्ण इनके संबध में तर्कबुद्धी का उपयोग ही नहीं करते हैं। उन्हे पूजनीय ईश्वर के रूप में प्रतिष्ठापित कर हम इतने संतुष्ट हो गए हैं कि उनका चरित्र कहीं स्पष्ट रुप से मार्गदर्शन करता है तो कहीं जीवन के मूल्यों की ओर इंगित कर हमें हमारी परिस्थिति में विचार करने की व निर्णय लेने की दिशा दर्शाता हैं, यह तो हम कदाचित भूल ही गए हैं।

इसी कारण, प्रभुचरित्र में जहाँ कहीं भी सरल स्पष्टीकरण उपलब्ध ना हो, वहाँ शंकालु जीव प्रभु पर लांछन लगाने की, उनपर उंगली उठाने की, उनके चारित्र्य हनन की होड लगा देते हैं। 
जहाँ भी स्पष्ट उत्तर उपलब्ध ना हो, वहाँ श्रीराम चरित्र का प्रतिकुल अर्थ लगाने से हिंदु धर्मियों में ही संभ्रम स्थिती निर्माण हो जाती हैं।

ऐसे में, हम श्रद्धालु हिंदुओं को चाहिए की हम श्रीराम चरित्र पर विचार कर उनकी कृति का अर्थ लगाए व प्रभुचरित्र के उस उज्वल पक्ष को प्रस्तुत करें, हमारी अगली पिढी को बताए !

वैसे भी प्रत्येक धर्म में उनके ईश्वर / संस्थापक /प्रेषित इनके आख्यान / चरित्र में कुछ भाग ऐसा होता ही हैं जिसके संबंध हम तर्क ही कर सकते हैं क्योंकि उनका साक्ष्य / प्रमाण नहीं होता हैं। इसिलिए 'उन्होने यह सोचा था/ उनका उद्देश यह था / उनकी ऐसी योजना थी ' ऐसे विधान किए जाते हैं। आधुनिक युग के किस व्यक्ती को उस काल में उनके मन की भावनाएँ जानने का सौभाग्य प्राप्त हुआ हैं?
नहीं हुआ हैं !
अर्थात यह बात तर्कबुद्धी की ही हैं, तो आइये, हम भी श्रीरामजी के चरित्र में निहित अर्थों को समझने का प्रयास इसी नीति से करेंगे !

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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