#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ४५- दि. ०८.०७.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ४५ : दि . ०८.०७.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
श्रीराम का वनवास सुखसुविधायुक्त वनविहार नहीं था। उन्होने वनवास के अनुरूप वल्कल (वृक्षों की छाल से बने वस्त्र) धारण किए।
सीताजी के लिए वल्कल धारण करना आवश्यक नहीं था। किंतु उन्हे वनवासी पति के साथ रेशमी वस्त्र व अलंकार धारण करना मान्य नहीं था। उन्होने भी पति समान वल्कल धारण कर लिए।
ऋषि विश्वामित्र की भविष्यवाणी सत्य हो रहीं थी ! रघुकुलवधू को महलों की सुख सुविधा का मोह बांध नहीं पाया और वह राम के साथ चौदह वर्ष के कठोर वनवास के लिए चल पडी।
यह अज्ञानतावश अथवा उर्मी से लिया गया निर्णय (impulsive decision) नहीं था।
अबतक जो सुविधाएँ सहजरूप से उपलब्ध थी , वनवास में उनमें सें अंश भी ना मिल पाएगा यह वे जानती थी....
शारीरीक कष्ट प्रचुर मात्रा में होंगे यह भी वे जानती थी....
चौदह वर्ष के दीर्घ काल तर मायका - ससुराल दोनो ओर के सभी संबंधियों से टूटकर जीना पडेगा यह भी वे जानती थी....
अर्थात पति के साथ वन में जाने का उनका निर्णय ना तो बाध्यता थी, ना ही आवेग में लिया गया निर्णय !
फिर क्यों गई वे वनवास के लिए ?
पहला कारण, पति - पत्नी का सुखदुख एकदूसरे जो जुडा हुआ एकात्म जीवन होना चाहिए इसका उदाहरण सीताजी ने स्वयं प्रस्तुत किया।
दूसरा कारण, जैसे की हम पहले ही देख चुके हैं, श्रीराम-सीता वनवास यह एक अतिविशाल पट हैं जिसकी पार्श्वभूमि में अयोध्या के युद्धकुशल , बुद्धीमान राजकुमार अपनी दूरदर्शिता से जनकल्याण हेतु वह सब कुछ कर गए जो अयोध्या के राजमहल में युवराज अथवा सम्राट बनकर नहीं किया जा सकता था।
उनका वैयक्तिक लाभ यह था कि वे विविध ऋषियों के आश्रम में विविध विषयों पर ज्ञान प्राप्त कर पाएं, चर्चा व विचारविमर्श कर पाएं !
परंतु इससे भी महत्वपूर्ण यह था कि अयोध्या के भावी राजा इस काल में वनवासीयों के जीवन के विषय में बहुत कुछ समझ पाए, उनकी समस्याएँ - कठिनाइयों का अनुभव किया, इसी वनभ्रमंति के माध्यम से उन्होने अयोध्या से लंका तक संपूर्ण राष्ट्र को एक विचारधारा में बांधा, उन्होने भद्र -राजकुल के लोग व वनों में रहने वाली जनजातियों के बीच सौहार्द स्थापित किया, उन में परस्परविश्वास व आत्मविश्वास जागृत किया (इस मुद्दे पर हम आगे विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे)।
वनवास के लिए एक ही सुरक्षित - रम्य स्थान पर कुटी स्थापित कर रहने का पर्याय उनके लिए भी उपलब्ध था। किंतु यह प्रभु की योजना नहीं थी क्योंकि इससे तो राम वनवास का प्रवेश, जो जीवन के रंगमंच के लिए लिखा गया था, वही अर्थहीन हो जाता !
प्रभु के वनवास के अद्भुत - रोमांचकारी अध्याय को हम आगे बढाएंगे......
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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