#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ७४ - दि. ०६.०८.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ७४ : दि. ०६.०८.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

यह कल्पना करना कठिन है कि अपने पहले बच्चे की कंस द्वारा हत्या के पश्चात वसुदेव देवकी की मनस्थिति कैसी रही होगी और इस अकल्पनीय घटना के पश्चात पुनः अपत्यसंभव की सूचना ने उनके मनपर क्या परिणाम किया होगा।

सामान्यतः जो अनिर्वचनीय आनंद की घटना होती हैं उसे कंस ने वसुदेव देवकी के लिए अत्यंत वेदनादायी परीक्षा बनाया था।

इसके बाद भी पाँच बार देवकी ने इस पीडा को सहन किया। शिशु का जन्म होते ही कंस आ धमकता था और वसुदेव देवकी उसी भीषण दृश्य के असहाय्य साक्षी बनते थे।

वसुदेव देवकी के सातवे पुत्र ने वसुदेव की ज्येष्ठ भार्या रोहिणी के गर्भ से जन्म लिया।  इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं हैं।

परंतु यह मान्यता हैं की देवकी का गर्भ रोहिणी के गर्भाशय में रोपित किया गया और उसे गोकुल में वसुदेव के मित्र गोकुल के प्रधान नंद के पास भेजा गया। इसकी सूचना कंस को कदाचित देवकी के गर्भपात के रुप में दी गई थी। किंतु इसका विवरण इतना बारिकी से मिलना कठिन है। 
कंस का संशयी मन अब भ्रमित तो अवश्य हुआ होगा क्योंकि अब देवकी के आठवे पुत्र की गिनती कैसे करें?
इस गर्भ को गिनती में ले अथवा ना ले?
फिर कदचित उसने स्वयं को समझाया होगा की जब सभी बच्चों को मारना ही हैं तब गिनती करना भी अर्थहीन है।

बाह्यतः कंस जितना भी निष्ठुर, निर्मम क्यों ना हो, मन में वह अवश्य जानता होगा की जब भगवान का अवतार निश्चित होता हैं तब उसे रोकना संभव नहीं हैं। 

मन ही मन वह जानता होगा की उसकी मृत्यु ईश्वर के अवतार द्वारा निश्चित हैं जैसी भविष्यवाणी थी। 
देवकी के बच्चों की हत्या करना यह उसका स्वयं को बचाने का अंतिम दयनीय प्रयत्न था। और वह अत्यंत भयभीत व्यक्ती जैसा ही अतार्किक - दुस्साहसिक व्यवहार कर रहा था। अन्यथा नवजात शिशुओं की भीषण हत्या करने जैसा घृणित कर्म कौन कर सकता हैं !

परंतु कंस के विविध प्रयत्नों के उपरांत भी भगवान विष्णु मानवरूप में अवतरित हुए और दुष्ट निर्दालन और धर्म की पुन:प्रतिष्ठा का अपना वचन उन्होने पूर्ण किया 🙏🏼

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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