#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ७२ - दि. ०४.०८.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ७२ : दि. ०४.०८.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

कृष्ण जन्म से पूर्व माता देवकी की स्थिती देखिए । उसके आठ बच्चे होंगे इस वार्ता से उसे प्रसन्नता भी नहीं हो पाई होगी।

अपत्यजन्म की संभावना की वार्ता किसी भी दंपति के लिए अनिर्वचनीय आनंद का अनुभव होता है। परंतु वसुदेव - देवकी को यह सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ था। 

जिनके आठवे बच्चे की हत्या उसके मातुल (मामा) द्वारा ही होने की आशंका हो वह अपने बच्चों के जन्म के आनंद का अनुभव कैसे कर पाएंगे !
गर्भावस्था का संपूर्ण समय माता देवकी के लिए तनावपूर्ण रहा होगा।

सामान्यतः गर्भवती स्त्री का मन प्रसन्न रखने के लिए, उसके शिशु के मानसिक - शारिरीक विकास के लिए उसका विशेष रुप से ध्यान रखा जाता है, उसका मन प्रफुल्लित - आनंदित रखने के लिए गोदभराई समारोहों का आयोजन किया जाता हैं। कुटुंब की अनुभवी ज्येष्ठ स्त्रियाँ उसका विशेष ध्यान रखती हैं।
देवकी के लिए यह सब कदाचित हुआ ही ना हो।

दुराचारी, अत्याचारी सबसे अधिक भीरु होते हैं क्योंकि उन्हे भौतिक सुख - संपत्ति आदि का मोह इतना अधिक होता हैं कि किसी भी प्रकार से, मृत्यु के कारण भी उस से वंचित होने की कल्पना मात्र से वह भयभीत होते हैं। अमरत्व प्राप्त कर निरंतर भोगविलासों में डूबे रहने की लालसा ऐसे व्यक्तियों को अत्याधिक कायर और हिंसक बना देती हैं ।

वसुदेव - देवकी ने कदाचित सोचा होगा की वह बच्चे को उनसे छीनकर ले जाएगा। 

परंतु मृत्युभय से आक्रांत होने के कारण क्रोध से तिलमिलाए कंस ने शिशु को भूमि पर पटक - पटक कर मार दिया ! 
कंस के हाथों उस सद्यजात शिशु की अत्यंत भीषण मृत्यु हुई।

जचकी की थकान और वेदना से जिसका शरीर अभी भी चूर चूर हो रहा हो, जिसने अपने बच्चे को अभी भरपूर आँखो से देखा भी ना हो, जिसके वक्ष से अभी दूध की धारा बहने को हो, उस माता का मन अपने नन्हे शिशु की ऐसी भयानक हत्या से कैसा आक्रोश कर उठा होगा इसकी कल्पना मात्र से भी मन काँप उठता है।

कंस ने इसके पूर्व भी अनन्वित अत्याचार किए थे। परंतु देवकी के साथ उसने किए व्यवहार जैसा अन्य कोई उदाहरण नहीं हैं। 
परंतु यह तो देवकी के दुर्भाग्य का प्रारंभ मात्र था। उसे इसी पीडा को पुनः और पुनः पुनः भोगना था....

साक्षात विष्णु जिसकी कोख से जन्म लेंगे वह माता भी तो अद्वितीय होनी चाहिए जैसे देवकी थी!
वसुदेव देवकी के भी अनेक जन्मों का पुण्यफल था विष्णु ने मानवावतार के लिए इस दंपति को चुना। 

कृष्ण के कारण विश्वकल्याण तो इसके अनेक  वर्षों के पश्चात हुआ परंतु कृष्ण जन्म से पूर्व कंस द्वारा अत्याचारों की पीडा झेलनेवाली कृष्णमाता ने विश्वकल्याण लिए सर पर अंगार झेला था।
विश्व में आतंक जब ऐसा विकराल रूप धारण करता हैं तब भक्तों के तारणहार भगवान अवतार लेने के लिए प्रस्तुत होते हैं जिनके आख्यानों का आनंद हम लेते रहेंगे ।

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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