#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ८२ - दि. १४.०८.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ८२ : दि. १४.०८.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

ईश्वर पर श्रद्धा रखने का अर्थ हैं उनके सामर्थ्य पर श्रद्धा रखना। और नास्तिकता के मायने हैं हमारी सोच - समझ से परे जो कुछ भी हो उसे निरर्थक असंभवता मानना !

हम किस पक्ष में हैं इसका निर्णय हमें ही करना हैं, परंतु यह जानकर करना हैं कि चमत्कार केवल सनातन हिंदु धर्म का भाग नहीं हैं, उनका वर्णन तो प्रत्येक धर्म में हैं। 

ख्रिश्चन धर्म में Vatican के पोप द्वारा Saint पदवी प्रदान के लिए चमत्कारों का प्रमाण आवश्यक होता हैं.... 
मुस्लिम धर्म में पैगंबर मोहम्मद द्वारा किए गए चमत्कारों का वर्णन हैं.... 
ज्यू धर्म में मोझेस द्वारा ईश्वर की दस आज्ञाओं को मनुष्यों तक पहुँचाने का चमत्कारी वर्णन हैं....
अर्थात विश्व के सभी प्रमुख धर्मों में 'चमत्कार ' इस घटना को मान्यता हैं ! 

क्योंकि ईश्वर का नाम प्रत्येक धर्म में पृथक हैं परंतु सभी धर्म ईश्वरी शक्ती में विश्वास करते हैं❗ 

....और ईश्वरी शक्ती का मनुष्यों के साथ जुडने का अथवा मानव को ईश्वरी शक्ती के अस्तित्व का प्रमाण देने का महत्वपूर्ण माध्यम चमत्कार माना जाता रहा हैं ।

इसलिए, हमारे सनातन धर्म में  चमत्कार के जो वर्णन हैं उसे उपरोल्लिखित तथ्य के आलोक में देखना होगा।

....और यदि कोई व्यक्ती नास्तिक ही बनना चाहता हैं तो वह उसका अपना निर्णय हैं। उन्हे चमत्कार में विश्वास नहीं हैं क्योंकि ईश्वर में आस्था नही हैं!

हाँ, तो हम बात कर रहे थे कंस के रुप में देवकी के कक्ष में व्याप्त आतंक की....
कंस ने जैसे ही कन्या को भूमि पर पटककर मारने के लिए उपर उठाया, वह उसके हाथों से छिटककर आकाश में उड गई और आकाशवाणी समान उसने कंस से कहा, "दुष्ट ! तुम्हे मारनेवाला जन्म ले चुका हैं.."।
और देखते ही देखते वह आकाश में लीन हो गई।
वह तो योगमाया थी, उसकी कंस के हाथों मृत्यु होना संभव नहीं था !

कंस आँखे फाडकर आकाश की ओर देखता रहा..
उसके हाथो में अभी अभी एक नन्हा सा शिशु था और अभी अभी एक अत्यंत भयानक भविष्यवाणी कर वह शिशु अंतर्धान हो गया था....

यह आभास था या सत्य, कंस समझ नहीं पाया। 
प्रांगण में उपस्थित सभी लोग कोई प्रतिक्रिया अथवा भाव प्रकट न करने के लिए सावधान थे, परंतु मन ही मन आनंदित अवश्य हो रहे होंगे।
कंस के इतने प्रयत्न, इतनी सावधानता और देवकी के बच्चों को जन्म लेते ही मार देने की आत्यंतिक क्रूरता के पश्चात भी कंस का काल अवतार ले चुका था यह वार्ता प्रसन्न करनेवाली ही थी।

इधर कंस क्रोध और हताशा से तिलमिला गया। उसने वसुदेव - देवकी, उसकी धाय और सेविका को सत्य बताने के लिए धमकाया।
देवकी क्या ही बताती ! उसने असहाय्यता से वसुदेव को ओर देखा। 
वसुदेव इसके लिए प्रस्तुत थे। उन्होने कंस को सीधा सपाट उत्तर दिया की कंस के सैनिकों के रहते वे तो कैद में ही हैं, वे क्या बता सकते हैं, और रही बात शिशु की तो कंस ने स्वयं वह घटना देखी हैं जिसमें वसुदेव क्या कर सकते हैं !

कंस के क्रोध की सीमा नहीं थी। उसने देवकी की धाय और सेविका को भी धमकाया।
जैसा वसुदेव ने उन्हे पहले ही बताया था दोनो ने देवकी के मध्यरात्री में प्रसूत होने की और कन्याजन्म की पुष्टी की ! 
तिलमिलाए कंस ने सैनिकप्रमुख को बुलाया और रात में सैनिक को के तैनाती की और सतर्कता की पृच्छा की। उसे भी तो कंस का भय था, वह क्यों बताता की रातभर सुरक्षाकर्मी उतने सावधान नहीं थे ! वैसे भी इतनी भयानक रात में कुछ विशेष नहीं हुआ होगा ऐसा विश्वास तो उसे था ही !

आत्यंतिक आक्रोश और मृत्युभय से व्याप्त कंस राजमहल में लौट गया।

उधर गोकुल में घटनाओं ने ऐसा मोड लिया था जो मानव इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण महानाट्य के आरंभ की मंगल शंखध्वनि थी !

हरीकथा के विशाल पट को शब्दों में बांधना साधारण मनुष्य के लिए संभव नहीं हैं, परंतु हम हरीगुणगान करते रहेंगे !

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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