#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग २६ - दि. १९.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग २६ : दि. १९ .०६.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
हमारे धर्म और संस्कृति में विद्वत्ता के कारण सम्मानित स्त्रियों की गौरवशाली परंपरा के आख्यान में आपका स्वागत है🙏🏼
पहला अत्यंत स्वाभाविक नाम है ब्रह्मवादिनी गार्गी वाचक्नवी 🙏🏼
ऋषी गर्ग के कुल में ऋषि वाचक्नवु की पुत्री थी ब्रह्मवादिनी गार्गी।
ब्रह्मवादिनी यह पदवी है। इसका अर्थ है जिसे 'ब्रह्म' का ज्ञान प्राप्त हुआ हो ऐसी व्यक्ती। इन्होने पवित्र ऋग्वेद के अनेक ऋचाओं की रचना की हैं। विख्यात तत्वज्ञानी राजा जनक ने ब्रह्मयज्ञ के अंतर्गत तत्वज्ञ चर्चा का आयोजन किया था जिसमें परमज्ञानी ऋषी याज्ञवल्क्य व गार्गी वाचक्नवी इनकी वादचर्चा प्रसिद्ध हैं । ऋषियों, पण्डितों, ज्ञानियों की इस सभा में ऋषी याज्ञवल्क्य से साथ प्रश्नोत्तरों के इस सत्र का साहस केवल गार्गीदेवी ने ही किया था।
जिज्ञासुओं के लिए स्पष्ट करते हैं की देवी गार्गी आजन्म अविवाहित रहीं।
सारांश यह है कि वेदकाल में एक अविवाहित स्त्री को विद्वानों की सभा में संवाद, विचारविमर्श एवं चर्चा के लिए आदर से आमंत्रण दिया जाता था।
भारत की उदात्त हिंदु संस्कृति इस अध्याय के संबध में सबको जानना चाहिए ‼️
दूसरा नाम हम लेंगे ऋषि याज्ञवल्क्य की पत्नी मैत्रेयी का।
कालानुरूप समाजव्यवस्था भी बदलती रहती है। तो मानव इतिहास के उस काल में हमारे देश में बहुपत्नीत्व प्रचलित था। इसके अनुरूप ऋषि याज्ञवल्क्य की दो पत्नियाँ थी, मैत्रेयी और कात्यायनी।
ऋषि का गुरुकुल था जिसमे विद्यार्जन के लिए निवासी शिष्य हुआ करते थे । ऋषिपत्नी कात्यायनी ने गुरुकुल के संपूर्ण व्यवस्थापन का भार ले रखा था। मैत्रेयी के पुत्र का पालनपोषण भी कात्यायनी ही करती थी।
मैत्रेयी ऋषि के साथ गुरुकुल में अध्यापन (teaching ) करती थी।
राजा जनक की सभा में वादचर्चा के पश्चात ऋषि याज्ञवल्क्य गृहस्थाश्रम को छोडकर संन्यासाश्रम को ओर उन्मुख हुए । मैत्रेयी ने पति से उनके साथ संन्यास लेने की अनुमति प्राप्त की। गुरुकुल की व्यवस्था के साथ अपने बच्चों के पालन पोषण का कर्तव्य भी कात्यायनी को सौंपकर मैत्रेयी ने जीवन के नए अध्याय आरंभ किया।
देवी मैत्रेयी विदुषी थी। ऋग्वेद की कुछ ऋचाओं की रचना उन्होने की थी । ऋषि याज्ञवल्क्य और देवी मैत्रेयी का आत्मन् और ब्रह्मन् इस विषयपर संवाद प्रसिद्ध है |
तात्पर्य :
हिंदु संस्कृती, हिंदु धर्म स्त्रियों को वंदनीय मानता है, उनका सम्मान करता है। इस काल के पश्चात मध्ययुग / आधुनिक युग में भी स्त्रियों पर किए जानेवाले विविध अत्याचार मनुष्य की विकृत, तुच्छ सोच के निदर्शक हैं, हिंदु धर्म की स्त्रीसंबधी धारणा के निर्देशक नहीं ❗
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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