#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ३२- दि. २५.०६.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ३२ : दि. २५.०६.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
आज हम देवीमाँ द्वारा किए गए असुर संहार के आख्यान का प्रारंभ करेंगे।
यह आख्यान केवल घटनाओं का वर्णन नहीं हैं, मनुष्य जीवन को प्रभावित करनेवाले मार्गदर्शक तत्वों की गाथा है !
महिषासुर के नाश की योजना बनाने के लिए देवता एकत्र हुए। राक्षस के अत्याचारों का वर्णन सुनते ही ब्रह्मा, विष्णु व महेश इन तीनो देवों के तेज से मिलकल तेज का एक महाकाय पुंज (beam) निर्माण हुआ जो अंततः कांतिमान स्त्री (देवी) के रूप में परिवर्तित हुआ।
सभी देवताओं ने (= देव / प्रकृति की शक्तियाँ जैसे वायु, अग्नि, वरुण, इंद्र, चंद्र, यम, दक्षप्रजापति, क्षीरसागर, विश्वकर्मा, पर्वत, शेषनाग) देवी को विभिन्न शक्तियाँ, शस्त्र और अलंकार भेंट किए।
देवी की प्रचंड गर्जना से चकित और क्रोधित महिषासुर अपने सेनानी और सैन्य के साथ देवी से युद्ध के लिए चल पडा। उसका सेनापति चिक्षुर, बलवान सेनानायक व महादैत्य चामर, उदग्र , महाहनु, असिलोमा, परिवारित, बिडाल आदि अनेकों ने अपनी प्रचंड सेना के साथ देवी पर आक्रमण किया।
असुरों के आक्रमण से क्रोधायमान देवी पुनःपुन्हा भयंकर सिंहगर्जना कर रही थी, देवी की आँखे क्रोध से रक्तवर्णी हुई थी और मुख अत्यंत उग्र हो चला था।
सिंह पर स्वार देवी एक ही समय विभिन्न शस्त्र चलाकर राक्षसों की सेना का निःपात कर रही थी तथा रणवाद्यों की ध्वनि से (जैसे शंख, ढोल, मृदंग इ.) उत्तेजित, उत्साहित देवी के गण राक्षससेना पर हावी हो रहे थे !
तुमुल युद्ध के पश्चात देवीने महिषासुर का वध किया।
कहानी 👆🏼❓
नहीं❗❗❗
यह केवल कथा नहीं हैं, मनुष्यजीवन के लिए अर्थपूर्ण पाठ हैं❗
कैसे ❓👇🏼
प्रथम महत्वपूर्ण तत्व, ब्रह्माविष्णुमहेश के सम्मिलित तेज से देवी (स्त्रीरूप) प्रकट हुआ, देव (पुरुषरूप) नहीं !
यह हैं हिंदु धर्म की स्त्रीसंबधी कल्पना ! स्त्री का रक्षण करने की आवश्यकता ही नहीं हैं, वह तो रक्षण करनेवाली हैं !
उसे शस्त्र दिजिये, उसके सामर्थ्य का विकास होने दिजिए, वह मदद की याचना नहीं करेंगी, स्वयं संरक्षक बनेगी !
दुसरा तत्व समाजकल्याण के लिए सार्वकालिक सत्य हैं।
संकट का सामना सबको मिलकर करना हैं, एकजुट होना हैं, प्रत्येक व्यक्ती यदि स्वतंत्र रुप से लडेगा तो हार हो सकती हैं, इसलिए सेनानी (समर्थ, विचारी, दूरदृष्टी रखनेवाला, धर्मशील) को चुने तथा उसकी योजना के अनुसार अपनी निति /चाल निश्चित करें !
तीसरा तत्व अत्यंत महत्वपूर्ण हैं हमारे देवताओं की विचारधारा व सीख जानने के लिए.....
हमारे देवता सदैव शस्त्रसज्ज हैं ! महिषासुर के वध के लिए देवों ने जो शस्त्र देवी को दिए उनकी सूची देखिए 👇🏼
श्री शंकर - शूल
श्री विष्णु - सुदर्शन चक्र
अग्निदेव - शक्ती
वायु - धनुष्य बाण
इंद्र - वज्र
वरुण - पाश
विश्वकर्मा - परशु, अनेक अस्त्र व कवच
हिमालय - वाहन (सिंह) इत्यादी अनेक
तात्पर्य यहीं हैं कि हम स्वयं भले ही शांतिप्रिय हो, परंतु विश्व में असुरों की कमी नहीं हैं, इसलिए अहिंसा के तत्व को माननेपर भी शस्त्रसज्जता को कर्तव्य मानना यह निरुपाय हैं ❗❗❗
चौथा तत्व, संकट एक ही दिशा से नहीं आता हैं, एक ही समय अनेक दिशाओं से हमे घेरा जा सकता हैं जैसे उपर वर्णन किया गया है कि देवी अनेक महाराक्षस व उनकी सेनाओं से एक ही समय युद्ध कर रही थी!
तात्पर्य, जीवन में एक ही समय विविध संकट आने की स्थिति में हमें प्रतिकार के लिए सज्जता रखनी चाहिए।
👆🏼Canvas यदि विशाल कर लें तो यह सभी तत्व राष्ट्रजीवन के लिए लागू हैं !
महायुद्धों के काल में पुरुष जब प्रत्यक्ष युद्ध लढ रहें थे तब युरोप के अनेक देशों में महिलाओं ने देशांतर्गत सेवाएँ - उत्पादन - भूमिगत प्रतिकार में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई थी !
शस्त्रसज्जता, दूरदर्शिता व शत्रु की चाल समझने के अभाव के कारण चीन के साथ युद्ध में भारत ने बहुत कुछ गंवाया है तथा आज तो हमारा देश एक ही नहीं सभी दिशाओं सें शत्रु के रडार पर है !
आक्रमण दृश्य रुप से हैं और अप्रत्यक्ष रुप से भी। हमारे समाजजीवन में असंतोष व फूट डालकर जो राष्ट्रहानि की जा रही है वह आक्रमण ही है !
एकजुट होकर - मिलजुलकर लढने से ही विजय प्राप्त हो सकता हैं, आपस के मतभेदों को तूल देकर एकदूसरे का असहकार करेंगे तो पराजय निश्चित हैं !
जागिए और देश को 🇮🇳 बचाइए 💪🏽
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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