#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ३८ - दि. ०१.०७.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ३८ : दि. ०१.०७.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
अभी अभी हमने भगवान विष्णु के दशावतारों की चर्चा की थी। आज हम दशावतारों में भगवान राम के आख्यान का प्रारंभ करेंगे । एकदम साँतवा अवतार क्यों ?
प्रथम अवतार से क्यों नहीं ?
क्योंकि यह हिंदु धर्मियों का प्रिय विषय हैं व इन्ही के संबध में विविध भ्रांतियाँ भी हैं !
श्रीराम का जन्म पुरुषप्रधान संस्कृति में हुआ था ।
त्योरियाँ चढाने की बात नहीं हैं ! विश्व में (कामरूप = असम ) जैसी गिनीचुनी सभ्यताएं ही होंगी जहाँ दीर्घकाल तक स्त्रीप्रधान व्यवस्था रहीं हो । बाकी विश्व में पुरुषप्रधान संस्कृती को ही माना जाता रहा हैं , इतिहास में भी व वर्तमान में भी !
हम उदाहरण भी देखेंगे ।
फ्रान्स की रानी मारी आंत्वानेत ( जो ऑस्ट्रिया की Holy Roman Empress Maria Theresa का पन्द्रहवा अपत्य थी) का विवाह फ्रान्स के युवराज से निश्चित किया गया । १४ वर्ष की आयु की राजकन्या.... अब इसे तो सुरुचिपूर्ण फ्रेंच मान्यताओं के अनुसार सुंदर भावी रानी बनाना आवश्यक था ! उसके लिए नए वस्त्र - अलंकार आए - उसकी केशसज्जा में परिवर्तन किया गया। सबसे दुखदायी अध्याय हैं इस राजकन्या के दाँत फ्रेंच अभिरुचिनुरुप बनाने का ।
विवाह योग्य 'कन्या देखने' आए फ्रेंच राजदूत को मारी के दाँत अच्छे नहीं लगे थे। तब प्रारंभ हुआ अनस्थेशिया रहित दाँत सुंदर बनाने की प्रक्रिया। १४ वर्ष की वह कन्या असह्य वेदना से महिनों तक बिलबिलाती रहीं परंतु पुरुषप्रधान समाज ने बनाई हुई सौंदर्य की व्याख्या सार्थक करने के लिए उसे वह सहन करना पडा था।
यद्यपि इसका प्रमाण मेरे पास नहीं हैं व इसमें Google search engine भी मदद नहीं कर रहा , किंतु लोकसत्ता वृत्तपत्र के लेखों मे पढा हुआ मुझे याद हैं की युरोप में इतिहासकाल में महिलाओं को एनस्थेशिया का अधिकार प्राप्त करने के लिए आंदोलन करना पडा था क्योंकि तब तक यह अधिकार केवल पुरुषों को था। जिज्ञासू इस संबंध में वास्तविकता का ज्ञान प्राप्त करें व हमें भी बताएं।
युरोप में महिलाओं को मतदान का अधिकार प्राप्त करने के लिए आंदोलन करा पडा था । सबसे अंत में (१९८४ में ) यह माननेवाला युरोपिय देश था लिचनस्टाइन (Lichtenstein)..
उदाहरण हम आगे भी देखेंगे ।
कोई भी न्यायी व्यक्ती महिलाओ के दमन का समर्थन कर ही नहीं सकता है । परंतु यहाँ हमारे विचारों की बात नहीं कर रहे , हम इतिहास देख रहें हैं ।
विश्व में महिलाओं की स्थिति का इतिहास हम क्रमशः देख लें, उसके पश्चात हिंदु धार्मिक ग्रंथों में वर्णित स्त्री की भूमिका व स्थिति पर चर्चा संदर्भ के अनुसार करते रहेंगे ।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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