#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग २२ - दि. १५.०६.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग २२ : दि. १५ .०६.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

आधुनिक विज्ञान , संशोधन , तंत्रज्ञान के चलते विविध अविष्कार किए गए है। नए वाहन, उपकरण, सुखसुविधा के साधन जुट गए हैं। इन सब के लिए इंधन की आवश्यकता होती है। अर्थात भौतिक रुप दिखनेवाली वस्तुओं के लिए बाह्य शक्ति (fuel / force) आवश्यक होता है ।

परंतु आधुनिक विज्ञान भी अनेक गुथ्थियों को सुलझा नहीं पाया है । 
उदाहरण के लिए, टेलिपॅथी जिसमें दो व्यक्तियों के बीच किसी साधन के बिना भी संवाद हो सकता हैं ..
जैसी माँ की शिशु के प्रति इतनी संवेदनशीलता, जिसके चलते वह शिशु की भावनाओं को, आनंद और वेदना को समझ लेती हैं ...
क्योंकि, यह सब👆🏼 मन की शक्तियाँ हैं जिनका उत्तर किसी भी तर्कशास्त्र में नहीं हैं।
सारांश यह है कि हम मन की शक्तियों को मानते हैं।

तो मन की ऐसीही शक्तियाँ अस्त्र दागने के लिए पुश बटन का कार्य करती हैं जैसे शिवजी ने पाशुपतास्त्र का प्रयोग किया था (बिना धनुष्य के भी यह अस्त्र चलाया जा सकता हैं , मन की शक्तीयों से )...

मन की शक्तियों का जब इतना महत्व है तब श्रीकृष्ण द्वारा पाण्डवों के राजसूय यज्ञ के समय विश्वरूप दर्शन कराना मान्य होना चाहिए ! 
आगे कुरुक्षेत्र पर युद्ध के समय (अपने स्वजन / गुरु आदियों के साथ युद्ध कर उनकी मृत्यु का कारण बनने की संभावना के कारण ) अर्जुन जब विचलित हुए तब भी श्रीकृष्ण ने विराट रुप के दर्शन उन्हे कराएं थे। मानव जीवन की क्षणभंगुरता और प्रत्येक जीव के लिए मृत्यु की अपरिहार्यता उन्हे समझाने के लिए श्रीकृष्ण ने उन्हे 'कालमुख' का दर्शन कराया था जिसमें सभी प्राणी मृत्यु के मुख में समा रहे थे। 

ऐसी घटनाएँ जड / भौतिक सृष्टी के नियमों के अधीन नहीं होती हैं... इनके तल में मनुष्य के मन को बांधकर दृश्य के परे (beyond) जो अदृश्य हैं उसे देखने - दिखाने का सामर्थ्य होता हैं !

ऐसे चमत्कारों का स्थान और उनका वर्णन प्रत्येक धर्म में है ।
जैसे ज्यू धर्मियों के जेरुसलेम के पवित्र धर्मस्थल को शत्रुओं से पुनः प्राप्त करने के पश्चात वहाँ प्रार्थना का आयोजन किया गया था। मान्यता हैं कि तेल से भरे एक अत्यंत छोटे पात्र ने आठ दिनों तक दिए की लौ (ज्योत) जलाए रखी थी....
ख्रिस्ती धर्म में शुक्रवार को क्रूसपर बली देने के पश्चात रविवार को येशु ख्रिस्त के पुनर्जिवित होने की बात सर्वमान्य हैं....
बुद्धदेव को बोधीवृक्ष के तले (ईश्वरीय ) साक्षात्कार हुआ यह मान्यता है....
मुस्लिम धर्म में पैगंबर महम्मद के अनेक चमत्कारों का वर्णन हैं जैसे उनके प्रार्थना करने पर बारिश हुई थी, वह बीमार और अंधे लोगों का उपचार अपने स्पर्श मात्र से कर सकते थे , उन्हे मार डालने के लिए आए शत्रुओं पर एक विशेष प्रकार से मिट्टी (dust ) फेंकनेपर वे अपने हत्यारों की आँखो के समक्ष अदृश्य हो गए...

तात्पर्य, चमत्कार अन्य धर्मों में भी हैं और उन धर्मां के अनुयायी इन चमत्कारों में श्रद्धा भी रखते हैं❗

अतः हमें भी हिंदु धर्म के अनुयायियों द्वारा मान्य चमत्कारों में विश्वास और आस्था रखनी चाहिए....

क्योंकि हमारा ज्ञान विश्व की संभावनाओं का अंत नहीं हैं। ऐसा बहुत कुछ हैं जिसे हम नहीं जानते, परंतु अन्य ज्ञानी लोग जानते हैं जैसे अणुबम की निर्मिती प्रक्रिया, अवकाश में विचरण करनेवाले उपग्रह की पृथ्वी पर से ही देखभाल करना / सुधारना आदि ...

धर्म में आस्था रखे, जीवन यह कोई युद्धक्षेत्र नहीं हैं जिसमें स्वधर्म को शत्रु मानकर कोई प्रत्येक समय प्रश्नचिन्हों की तलवार चलाते रहें ‼️

गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳


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