#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ४२ - दि. ०५.०७.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग ४२ : दि. ०५.०७.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

श्रीराम द्वारा सीता को पत्नी बनाने के विषय पर हम आज विचार करंगे।

यद्यपि जन्म के पश्चात अनाथ बन गई उस बच्ची को राजा की पालिता (adopted) पुत्री के नाते राजकन्या बननेपर भी नकारने का अधिकार श्रीराम के पास था, किंतु वे ससम्मान उसे रघुकुल मे वधू बनाकर ले आए। परंतु श्रीराम ने यह विवाह दयाबुद्धी से प्रेरित होकर नहीं किया था !

पहला कारण था ब्रह्मर्षि विश्वामित्र का आदेश । और उस युग में गुरुओं के आदेश अनुल्लंघनीय होते थे !

दूसरा कारण, यद्यपि इसका लिखित प्रमाण नहीं हैं व हमें इसे मनुष्य की सामान्य तर्कबुद्धी से ही समझना है ।

ब्रह्मर्षि विश्वामित्र ने अत्यंत दूरदर्शिता से सीता को रघुकुलवधू बनाने का निर्णय लिया होगा।
एक तो जनक कुल के राजा सीरध्वज जैसे विद्वान कर्तव्यपरायण व संन्यासी वृत्ती के निर्लोभी राजा के संस्कारों पर विश्वास था। 
दूसरे, गुरु विश्वामित्र ने कदाचित यह समझ लिया था की श्रीराम जिस कार्य के पृथ्वी पर मानवरूप में अवतरित हुए थे उसके लिए पत्नीरूप में सीता ही एकमेव पर्याय हो सकता था!

रघुकुल की मर्यादा के अनुरूप राजरानी के व्यवहार की , निर्णयक्षमता की व न्यायसंगत व्यवहार की अपेक्षा होने की स्थिति में वह राजसी संस्कारों के अनुरूप उच्च कोटी का व्यवहार करने में सक्षम होगी। 
और सामान्य - असहाय्य जनता की समस्याएँ समझने की आवश्यकता की स्थिति में वे स्वयं मातृपितृविहीन - अनाथ कन्या होने के कारण प्रजा की पीडा समझने में सक्षम होंगी।

अर्थात महलों में राम के साथ राजकन्या सीता होगी और वन में साधारण कन्या सीता, क्योंकि वह राजसी संस्कारों से युक्त साधारण कन्या हैं !
वह भिन्न हैं !
वह राजकुमारी होकर भी साधारण हैं और साधारण होकर भी राजकुमारी हैं !

रामसीता का विवाह अन्य राजकन्याओं के विवाह के समान स्वयंवर का पण पूर्ण करने की सामान्य घटना नहीं थी !

जिस धनुष्य से अनेक दिव्यास्त्र प्रक्षेपित किए जा सकते थे, भगवान शिव के उसी 'अजगव' नामक धनुष्य की प्रत्यंचा चढने पर भारतवर्ष को अत्याचारी राक्षसों से मुक्ति दिलाने के लिए आवश्यक पुरुष और शक्ति के एकत्रीकरण की नींव पडनेवाली थी !
(संदर्भ : स्व. नरेंद्र कोहली लिखित रामचरित्राधारित उपन्यास 'अभ्युदय' )

हम रामसीता आख्यान क्रमशः आगे बढाएंगे ।

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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