#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ६१ - दि. २४.०७.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ६१ : दि. २४.०७.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
रामायण की व्यक्तिरेखाओं पर विचार करने से पूर्व हम सीताहरण के प्रसंग पर विचार कर रहे थे।
राम व लक्ष्मण की अनुपस्थिती में सीताहरण हुआ था।
लक्ष्मणरेखा का प्रसंग सर्वविदित हैं। इसपर विचार करने पर अन्य संभावनाएँ देखी जा सकती हैं।
वन में बनाई हुई कुटिया संरक्षण की दृष्टी से साधारण ही होगी। या हो सकता की वन्य पशुओं से संरक्षण के लिए अथवा राक्षसों के प्रवेश में बाधा डालने के लिए कुछ विशेष प्रबंध किए गए हो। यद्यपि वन की कुटिया में ऐसे भयंकर शत्रुओं सें पूर्णतः संरक्षण संभव नहीं था परंतु स्वसंरक्षण के लिए थोडा समय मिल पाए ऐसा कुछ प्रबंध अवश्य किया होगा। क्षत्रिय असावधान नहीं होते थे। शत्रु का प्रतिकार करने का समय मिल पाए इतनी व्यवस्था अवश्य की जाती थी।
लक्ष्मणरेखा का अर्थ यह भी हो सकता हैं की लक्ष्मणजी ने कुटिया के ऐसे किसीभाग में रहने के लिए सीताजी को कहा होगा। किंतु उन्होने साधु को भिक्षा देने को बाध्यता मानकर लक्ष्मणजी के वचन के विपरीत वर्तन किया और रावण द्वारा उनका अपहरण कर लिया गया ।
सीताजी क्षत्राणी थी। जिस कन्या ने बाल्यावस्था में शिवजी का 'अजगव' धनुष्य उठाया हो उसे पिता ने क्षत्रियों के योग्य शस्त्रशिक्षा ना दी हो यह संभव नहीं है। तो कदाचित शस्त्रसंचलन का मूलभूत ज्ञान सीताजी को होगा भी।
यद्यपि रामलक्ष्मण वल्कल पहनकर वनवास के निकले थे परंतु प्रचुर मात्रा में शस्त्र तो उनके पास होंगे ही। और वह तो चौदह वर्षों के वनवास के लिए जा रहे थे, इसलिए वन्य प्राणी - लुटेरे - राक्षस इत्यादियों का सामना करने के लिए शस्त्रों की आवश्यकता तो सदा ही रहनेवाली थी। इस कारण शस्त्र बनाने के कुछ औजार / सामग्री उन्होने साथ रखी थी इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
यह भी माना जा सकता हैं कि सीताजी कुटिया में अकेली थी तब भी वहाँ शस्त्र तो होंगे ही !
अर्थात कुटिया में रक्षण के लिए सुरक्षित जगह भी थी और शस्त्र भी, परंतु यह सब शक्तिशाली रावण से स्वयं को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। युद्ध में अनुभवी और महाशक्तीमान रावण और सीताजी की शक्ति और शस्त्रसंचालन का साधारण ज्ञान इसकी तुलना भी कैसे हो सकती हैं ! इसी कारण सीताहरण हो पाया।
हम विषय से भटक नहीं रहें हैं, सूक्ष्म विचार करनेपर सीताहरण के इस सारे क्रम में हमे आधुनिक युग में भी पालन करने योग्य सीख मिलती हैं।
स्वयं की सुरक्षा प्रत्येक व्यक्ति को करनी चाहिए। इसके लिए कुछ नियम व बंधन होंगे तो उन्हे मानना हमारे ही हित में हैं। थोडी सी असावधानी में हमें बडे से बडे संकट में डाल सकती है। विश्व में कल्याणकारी शक्तियाँ हैं और राक्षसी वृत्ती के लोग भी है। उनसे स्वयं को बचाने के लिए एक ओर स्वयं का सामर्थ्य बढाना होगा और दूसरी ओर अनुशासित जीवन जीना होगा
यह कालातीत सत्य है !
रामायण के साथ ही हमारे अन्य इतिहास ग्रंथों की आधुनिक युग में सार्थकता पर हम विचार करते रहेंगे।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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