#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग २८ - दि. २१.०६.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग २८ : दि. २१ .०६.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

हमने हिंदु धर्म और भारतीय संस्कृती में स्त्रियों को प्राप्त आदर व सम्मान की चर्चा की थी !
 इसका अर्थ यह कदापि नहीं हैं की भारतवर्ष में स्त्रियाँ सदैव सुख भोगती रही हैं तथा  सबकुछ आदर्श था।
नहीं था ! 
हम इसपर भी चर्चा करेंगे।
परंतु इसके पूर्व हम एक महत्वपूर्ण मुद्दा स्पष्ट कर ही लें !
क्या USA के राष्ट्रध्यक्ष (President) चुनने का अधिकार हम भारतीयों को हैं ?
क्या इंग्लैण्ड में राजा / रानी होने चाहिए अथवा पूर्णतः संसदीय लोकशाही रखनी चाहिए इसपर मत देने का अधिकार हम भारतीयों को कभी मिलेगा ?
क्या नॉर्थ कोरिया के सत्ताधीश 'किम जोंग उन' के पूर्वजों ने उन्ही के घराने में देश की संपूर्ण सत्ता रखने की जो व्यवस्था बनायी है, उसपर मत देने का अधिकार हम भारतीयों को हैं ?
क्या जापान के वर्तमान सम्राट की बेटी भविष्य में वहाँ रानी बननी चाहिए न कि उसका चचेरा भाई (क्योंकि वह 'घर का बेटा है' केवल इस कारण) यह बताने का अधिकार हम भारतीयों को हैं ?
नहीं हैं ❗
क्योंकि हम उन देशों के नागरिक नहीं हैं, इसलिए हमे उनके मामलों में दखल देने का, मत देने का अथवा उनपर उंगली उठाने का कोई अधिकार नहीं हैं।
यह उनके घर की बाते हैं, तो वे ही इसे सुलझाएंगे❗
ठीक इसी प्रकार हिंदु धर्म में, संस्कृति - परंपराओ में परिवर्तन की आवश्यकता पर केवल Practicing हिंदु ही बात करेंगे, उसमें कौनसा परिवर्तन आवश्यक हैं इसकी व्याख्या भी करेंगे तथा आवश्यकतानुसार इसकी रुपरेखा भी बनाएंगे❗

विश्व के कितने ऐसे धर्म / संस्कृतियाँ आदर्श हैं, कितने धर्म / संस्कृतियाँ संपूर्ण न्यायोचित व्यवस्था से परिपूर्ण हैं ? 
कितने धर्म / संस्कृतियों में जात, त्वचा का रंग, आर्थिक स्थिती, लिंग इस आधारपर भेद नहीं किए जाते हैं अथवा उच्चनीचता नहीं आंकी जाती हैं ?
👆🏼 इनका कारण बताकर बंधन (पाबंदियाँ) नहीं लगायी जाती हैं ?
सभी के घर काँच के हैं❗
तो किसी को भी यह अधिकार हैं ही नही की वे दूसरों के घरों पर पथ्थर फेंकना तो दूर, उँगली भी उठाएँ ‼️
हम हिंदु आत्मपरिक्षण भी करते आए हैं और सुधार भी... 
यह क्रम आगे भी जारी रहेगा क्योंकि हम एक अत्यंत प्राचीन, वैभवशाली तथा उदात्त विचारों की बैठकवाले धर्म और संस्कृति से आए हैं, तो हम अपना घर व्यवस्थित कर ही लेंगे।
बाकी सब भी अपने अपने घरों की व्यवस्था संभाले। समय के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए परिवर्तन आवश्यक होता हैं जो हमें अपने अपने धर्म में ही करना चाहिए।
दूसरे धर्मों के प्रति विवादास्पद विधान करना / उनके देवता / आदर्श / परंपराओं पर हँसना / उनपर प्रश्चचिन्ह अंकित करना यह सब सामाजिक शांति और सुव्यवस्था के लिए बाधक है यह सभी को समझना अत्यावश्यक हैं❗ 

गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳


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