#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ८४ - दि. १६.०८.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ८४ : दि. १६.०८.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
प्रातः नंद यशोदा के पुत्रजन्म की वार्ता ने गोकुल के प्रत्येक घर को आनंदित किया।
नंद गोकुल के प्रधान थे। उनके संतान की कामना गोकुल के हर ग्वाले - ग्वालिन ने की थी।
यशोदा की गर्भावस्था में उसकी सहायता और देखभाल के लिए ग्वालिने आती रहती थी।
परंतु प्रकृति के रौद्र रुप ने उसकी प्रसूति के समय सहायता के लिए किसी को बुलाने का अवसर नंद को नहीं मिला था।
अतः पुत्रजन्म की सुवार्ता से सब आश्चर्यचकित व आनंदित हुए।
उनकी मृदु वाणी और ऋजु व्यवहार के कारण नंद - यशोदा के लिए गोकुल वासियों के मन मे आत्मीयता थी। इसलिए नवजात शिशु को देखने के लिए व यशोदा की सहायता के लिए उसकी सखीयाँ व अन्य ज्येष्ठ ग्वालिने आने लगी।
इधर मथुरा में जो कुछ भी हुआ था उसकी वार्ता नंद तक पहुँची थी।
वसुदेव द्वारा यशोदा की गोद में डाला गया शिशु असामान्य हैं यह तो वे समझ गए थे। साक्षात ईश्वर के अवतार को अपने घर बालक के रुप में पालने के दायित्व से नंद जहाँ गौरवान्वित हुए थे, वही यशोदा की वंचना करने के अपराधबोध से ग्रस्त थे।
उनकी अपनी कन्या का वृत्तांत तो वह सुन चुके थे।
वह योगमाया थी, कंस के हाथों उसकी हत्या नहीं हुई, उलटे वह कंस की मृत्यु की भविष्यवाणी कर गई है इस वार्ता से मन ही मन वह प्रसन्न थे और इस ईश्वरी कृपाप्रसाद की वार्ता यशोदा से छुपाने की बाध्यता से अन्यमनस्क भी थे !
परंतु मन के सारे भावों को छुपाकर उन्होने अति प्रसन्नता व आनंद का चोगा पहन लिया और नन्हे कृष्ण नंद यशोदा के घर पलने लगे।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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