#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १५२ - दि. २३.१०.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १५२: दि. २३.१०.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
कहते है कि जिन्हे अपना इतिहास ज्ञात नहीं होता हैं उनका भविष्य नहीं होता है। ऐसा इसलिए है कि इतिहास की जानकारी ना होनेपर हम पुनःपुन्हा वही भूल दोहराते ( repeat mistake) है और अपने भविष्य के मार्ग मैले कर लेते हैं।
भारत के साथ यहीं हुआ।
क्षात्रतेज का लोप होनेपर राज्य छिन जाता है और परतंत्रता और अन्याय के कठोर सिलबट्टे में सामान्य प्रजा पिसी जाती हैं इसके अनगिनत उदाहरण हमारे इतिहास में मिलेंगे किंतु फिर भी हमारे देश के छोटे - बडे संस्थानों के राजाओं ने अपने क्षात्रतेज पर कभी लोभ की, कभी भीरुता की और कभी उदासीनता की परत चढने दी।
फलस्वरूप , समूचा राष्ट्र १००० से भी अधिक काल की गुलामी की गर्त में गिर गया। और जब स्वतंत्रता मिली तब भी हमारी प्रिय मातृभूमि का बँटवारा कर खण्डित देश प्राप्त हुआ।
अब धर्मसंस्कार में भला यह इतिहास कहाँ से आ गया ?
हम आगे देखेंगे की यह सब किस प्रकार से सनातन हिंदु संस्कारों के विपरीत हुआ हैं।
हमारे धर्म के संस्कार पूजापाठ, हवन - याग - अनुष्ठान , व्रत और उपवास, तीर्थयात्रा और दानधर्म के नियमों तक ही सीमित नहीं है।
हमारा धर्म मस्तक उँचा कर गौरव से जीना सिखाता हैं। और धर्मपालन में बाधा बनने वालों से प्रायश्चित कराना भी आवश्यक मानता है। वैसी आवश्यकता हो तो शत्रु का वध भी निःशंकता से करना हमारे धर्म पालन का महत्वपूर्ण भाग हें !
हम इस मुद्दे पर उदाहरणों के साथ विचार करेंगे ।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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