#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ९६- दि. २८.०८.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार 
भाग ९६ : दि. २८.०८.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

 पूर्वार्ध:

श्रीकृष्ण के पांडवों के साथ प्रथम संबंध का उल्लेख उनके वनवास काल में मिलता हैं।
वारणावत के लाक्षागृह (लाख से बना भवन) में पांडवों को जलाकर उनकी हत्या करने की योजना दुर्योधन ने बनाई थी। पांडवों ने अपनी सुझबूझ और हितैषियों की सहायता से यह योजना विफल कर दी। भवन  जलकर राख हो गया परंतु पांडव और माता कुंती के प्राणों की रक्षा हो गई।  

किंतु दुर्योधन का पांडवों की मृत्यु का भ्रम कायम रहे इसलिए  हस्तिनापुर लौटने के बजाय वह  रहने के लिए अन्य सुरक्षित स्थान की खोज कर रहे थे। सुरक्षा की दृष्टी से वह घने जंगलों में से प्रवास कर रहे थे। इसी काल में श्रीकृष्ण और पांडवों की प्रथम भेंट हुई ऐसा बताया जाता हैं। 

श्रीकृष्ण और पांडवों में तत्काल आत्मीय संबंध प्रस्थापित हुए। मनोमिलन के लिए दोनो की वृत्ती अनुकुल थी। श्रीकृष्ण तो अपने आप में अद्वितीय थे, साथ ही पांडवों का स्वभाव और वृत्ती के कारण कृष्ण ने उनमें धर्मरक्षण की संभावना देखी। उस युग में भी स्वार्थी - अत्याचारी राज्यकर्ताओं के कारण प्रजा को अनेक प्रकार के दुखों का सामना करना पड़ता था। राजाओं का शस्त्रबल और सैन्यशक्ती के कारण प्रजा विवश हो जाती वथी। अत्याचारी राज्यकर्ताओं का नाश कर पुनः न्याय पर आधरित समाज व्यवस्था कायम करना और अन्यायी राजाओं के मन में भय निर्माण करना इसके लिए श्रीकृष्ण समर्थ व्यक्ती की खोज  कर रहे थे। पांडवों में उन्होने अपनी खोज का उत्तर देखा।

प्रत्येक पांडव के अपने अपने गुण थे, विशेषताएँ थी। परंतु पाँचो पांडवों का एकसाथ रहना यही उनका सबसे बडा बल था। वह पाँच यदि एक साथ रहते तभी वह श्रोकृष्ण के उद्देशों को मूर्त रुप दे सकते थे। परंतु प्रत्येक पांडव का स्वभाव, विचारपद्धति और मूल वृत्ति भिन्न - भिन्न थी। फिर भी वह एक साथ ही थे क्योंकि उनकी माता ने उन्हे एकसाथ बाँध रखा था और मातृप्रेम - आदर का यह बंधन पाँच व्यक्तियों को एक अभिन्न गुट के रुप में एकत्रित रखने के लिए अत्यावश्यक था। 

किंतु श्रीकृष्ण जानते थे की माता कुंती के पश्चात पांडवों को  एकत्र बांधने के लिए वैसे ही दृढ बंधन की आवश्यकता होगी क्योंकि माता - पिता का साथ आयु की एक मर्यादा तक ही होता है।

इसलिए कृष्ण ने पांचाल देश की राजकुमारी द्रौपदी का विवाह पांडवों से करने की योजना बनाई !

 उत्तरार्ध दि. २९.o८.२०२३ को 

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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