#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १५४ - दि. २५.१०.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १५४: दि. २५.१०.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 
 
हमारे देश पर परकीयों के आक्रमण साधारणतः आठवी सदी से प्रारंभ हुए। इसके पूर्व भी परदेसी राज्यकर्ताओं की वक्रदृष्टी के आघात इस संपन्न - समृद्ध देश पर हुए थे, किंतु जिन आक्रमणों ने इस देश के भविष्य को प्रभावित किया ऐसे आक्रमणों के प्रारंभ का यह कालखण्ड था।

यह आक्रमण तुर्कस्तान से, अरब राज्यों से और उझबेकिस्तान से हुए। अगले अनेक शतकों तक सिंध के मार्ग से आक्रमक आते रहें और इस शांतिप्रिय देश को लुटते रहे।

मुहम्मद -बिन -कासिम , मोहम्मद गझनी , मुहम्मद घोरी, अल्लाउद्दीन खिलजी, कश्मीर के मार्ग से मंगोल शासक .... एक के पश्चात एक सब हमारे देश पर धावा बोलते रहे और इस देश के राजा दाहिर, पृथ्वीराज चौहान आदि पराभूत होते रहे।

यह केवल राजाओं के बदलने का इतिहास नही हैं, यह सनातन हिंदु धर्म पर हुए आक्रमणों का रक्तरंजित इतिहास हैं। 
इसी कालखण्ड में जिझिया कर लगाया गया और धर्मांतरण किए गए।

देश के साथ धर्म पर अगले भयानक आक्रमण पोर्तुगाल से हुए। सोलहवी सदी में पुर्तगालियों ने इस देश में हाथपैर पसारना प्रारंभ किया और Goan Inquisition ने हिंदु धर्म के लिए चुनौतियाँ खडी कर दी। गोवा में ख्रिश्चन धर्मांतरण का प्रारंभ हुआ।
Spanish Inquisition by King Ferdinand of Aragon और Goan Inquisition by the order of King of Portugal यह मानवजाति के इतिहास के अत्यंत निंदनीय अध्याय माने जाते है।

धर्मांतरण के लिए परकियों की बर्बरता जो नहीं सह पाए उन्होने धर्मांतरण कर लिया।
कुछ थोडे थे जो किसी प्रकार स्वयं को बचाते रहे।
आधुनिक कर्नाटक में पै, भट, दिक्षित, नायक / नाईक यह नाम पाए जाते हैं। यह वे लोग हैं जो Goan Inquisition के काल में मस्तक पर अपनी देवमूर्तियाँ लेकर जैसे तैसे गोवा छोडकर बच निकले थे क्योंकि उन्हे सनातन हिंदु ही बने रहना था।

अर्थात आक्रमणकरीयों ने मात्र संपत्ति की लूट नहीं की थी, वह हमारी श्रध्दा को भी तहसनहस करने लगे थे ।
अपने धर्म के प्रति हमारे मन में आस्था, प्रेम और भक्ति सब हैं, कमी है तो बस उसकी रक्षा की सिद्धता की !

इस इतिहास का स्मरण वेदनादायी हैं, किंतु हमारे भविष्य के लिए अत्यावश्यक है जिससे हम अपनी भूलों को दोहराने से बचे !

गर्व से कहे 👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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