#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १५५ - दि. २६.१०.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १५५: दि. २६.१०.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 
 
परकी आक्रमकों का भारत पर आक्रमण और इस देश की प्राचीन संस्कृती, सभ्यता और धर्म को छिन्नविछिन्न करने का इतिहास क्रूरता के अनेक पहलुओं को उजागर करता हैं।

कुछ आक्रमक थे जिनका कोई मुखौटा नहीं था। वे इस देश को लूटने के लिए आए हैं इसकी घोषणा उन्होने अपने शब्द और कृति दोनों से तत्काल ही कर दी थी।

मोहम्मद गझनी ने परमपवित्र सोमनाथ मंदिर १७ बार लूटा। शिवलिंग का अपमान किया, श्रद्धालुओं की हत्याएँ की और अनेक दुर्भाग्यशाली श्रद्धालु मातृभूमि की शीतल छाया सें खींचकर अरबस्तान के गुलामों के हाट (market) में बिक गए।
स्त्रियों पर अत्याचार तो उनका मुख्य उद्देश होता ही था। बलात्कार हुए, अत्याचार हुए, अनेक स्त्रियों को आक्रमकों हरम में जीवनभर यातनाएँ सहने का श्राप भोगना पडा, अनेकों को गुलामों के हाट में खडा किया गया। यहाँ पर भी उन्हे अपमानित ही किया जाता था, लालची - कामुक दृष्टी से उन्हे देखा जाता था, किसी वस्तु जैसा उन्हे हाथ लगाकर परखा जाता और गुलाम के रुप में जहाँ भी भेजी जाती थी वहाँ भी वे बलात्कार और अत्याचार का शिकार बनती थी।
छोटे बच्चे - बच्चियों को भी यह सब सहना पडा था। माता - पिता - कुटुब से बिछुडकर बेचारे नरकयातना भोगते रहे थे।

यह सब पढना - सुनना , उनपर विचार करना अत्यंत कष्टदायी हैं, परंतु अत्यावश्यक है ! क्योंकि आक्रमकों की मानसिकता सब युगों में समान ही होती हैं !

Goan Inquisition का प्रकार भिन्न था। 
इसमें हिंदुओ का ईसाई (Christian) धर्मांतरण ही महत्वपूर्ण मुद्दा था। उसके लिए प्रलोभन दिए गए और उसके फलस्वरूप जिन्होने धर्मांतरण किया उन्हे विविध उपहार दिए गए जैसे उपजाऊ जमीन दी गई, गाँव का मुखिया बनाया गया, छोटेमोटे पद दिए गए। 
जिस प्रकार जंगली हाथियों को पालतु बनाने के लिए पहले से पालतु बने हाथियों का उपयोग किया जाता है, उसी प्रकार इन धर्मांतरितों को उपलब्ध कराई गई सुख - सुविधाएँ - धन - पद आदि का लालच दिखाकर अन्य लोगों को भी लुभाने का प्रयत्न किया गया। 
जहाँ इस उपाय से बात नही बनी वहाँ दमन का मार्ग अपनाया गया। कृषियोग्य जमीन, घर छीन लिए गए, परंपरागत जागीर अथवा पद छीन लिए गए, उन्हे औरों को मजदूरी पर बुलाने से रोका गया ताकी वह खेतीबाडी ना कर पाने के कारण घुटने टेक दे, उनपर कर बढाए गए। विविध उपायों से उनके जीवन को कठिन से कठिनतम बनाया जाता था।

इन कठिनाइयों को झेलकर भी धर्मनिष्ठा कायम रखनेवालों की संख्या लक्षणीय थी। उनके लिए अत्याचार का मार्ग अपनाया गया।
किसी कठोर धर्ममार्तंड को इसके लिए बनी समिति का प्रमुख बनाया जाता था। 
एक विशेष कारागृह में 'अपराधियों' को भेजा जाता और उनपर अत्याचारों में क्रूरता की परिसीमा पार की जाती थी। यंत्रणा असह्य होनेपर अनेकों ने कुटुंब सहित धर्मांतर किया।
इसी काल में अनेकों को अपनी पूर्वजों की भूमि छोडकर अन्यत्र भागना पडा था।

आक्रमकों के इन भयानक कारनामों का इतिहास भीषण तो है, किंतु इतिहास ना पढने - सुनने से ना मिटता है ना बदलता है। इसलिए अपने सम्मुख मुँह बाएं खडी खाई की गहराई जानने - समझने के लिए मन पर पथ्थर रखकर हमें इतिहास का अध्ययन करना ही होगा। 
तभी हम अपने प्रिय सनातन हिंदु धर्म की सेवा कर पाएंगे।

गर्व से कहे 👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हिंदु धर्मसंस्कार 🚩 : भाग २१३

हिंदु धर्मसंस्कार 🚩 : भाग २४८

हिंदु धर्मसंस्कार 🚩: भाग २०२