#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ९०- दि. २२.०८.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ९० : दि. २२.०८.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
कृष्ण और बलराम दोनों को लेकर अक्रूर मथुरा पहुँचे।
यहाँ के नागरिकों में कृष्ण के प्रति प्रेम और उत्साह था। किंतु अति अल्प आयु के इन बालकों को देखकर वह चिंतित हुए। दुरात्मा कंस बलराम और कृष्ण के लिए कितना क्रूर हो सकता हैं इसकी कल्पना कर वे भयभीत भी हुए।
परंतु दोनो बालक निश्चिंतता से मथुरा भ्रमण कर रहे थे। धनुर्याग के मैदान में प्रवेश करते समय भी दोनो शांत और आनंदित थे। कंस अपने चुने हुए मल्लों के साथ उपस्थित हुआ।
कंस के प्रिय मल्ल चाणूर और मुष्टिक को कुश्ती के लिए तैयार देखकर प्रेक्षागार में उपस्थित नागरिकों में भय की लहर दौड गई।
चाणूर अपने भारी भरकम शरीर के तले प्रतिस्पर्धी को रोंदने के लिए कुख्यात था और मुष्टिक मल्लविद्या में निष्णात था। दोनो ने स्पर्धा के लिए कृष्ण और बलराम को ललकारा।
प्रेक्षक असहाय्य क्रोध से देख रहे थे। यह विषम सामना था और कंस के साथ चाणूर और मुष्टिक कुटीलता से हँस रहे थे।
परंतु कृष्ण ने स्पष्ट रुप से कह दिया कि पिता की अनुमति प्राप्त होनपर ही वे अखाड़े में उतरेंगे।
हाँ, अबतक कृष्ण - बलराम और वसुदेव - देवकी अपने वास्तविक संबध को जानकर एक दूसरे से मिल चुके थे।
भारी मन से वसुदेव ने अनुमति दी। इधर कृष्ण की और देखकर बलराम ने उनके मन की बात भाँप ली।
कृष्ण चाणूर के सामने जा खडे हुए। वह दृश्य एक प्रकार से बिभत्स था। दीर्घकार का, अत्यंत भारी शरीर का दैत्य समान चाणूर और बाल कृष्ण...
कृष्ण चरित्र में एक मुद्दा विचारणीय हैं। भगवद्गीता के कारण उन्हे तत्वज्ञानी (Philosopher) तो माना जाता हैं किंतु योद्धा कृष्ण, मल्ल कृष्ण, युद्धनीतीकुशल कृष्ण यह पहलु सदैव दुर्लक्षित रहें हैं !
चाणूर के सामने अखाडे में कृष्ण ने बुद्धीमान मल्ल के समान दाँवपेच लडाए। वह जानते थे कि चाणूर का बल उसके वजन में हैं और वह शरीर के नीचे मसलने का प्रयत्न करेगा। उन्होने अपनी चपलता को ही अपना सामर्थ्य बनाया। वे अखाडे में इधर - उधर घूमकर चाणूर को नचाने लगे । भारी शरीर के कारण वह थकने लगा। उसे पूर्ण रुप से थकाने के पश्चात कृष्ण ने उसकी गर्दन मरोडकर उसका अंत किया ।
इधर बलराम भी अपनी असाधारण मल्लविद्या के कारण मुष्टिक को मारकर विजयी हुए।
इस घटनाक्रम से पुनः यही सिद्ध हुआ हैं कि हिंदु देवी - देवता युद्धकुशल हैं और अमंगल का नाश करने के लिए शस्त्र उठाना और आक्रमण करना, शत्रु का वध करना इनके आदर्श वह स्वयं के वर्तन से प्रस्थापित करते हैं !
असुरो और आतंकवादियों के सम्मुख शांतिपाठ करने की भीरू सीख सनातन हिंदु धर्म ने कभी भी नहीं दी हैं ❗
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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