#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १५६ - दि.२७.१०.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १५६: दि. २७.१०.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 
 
किसी देश की स्वतंत्रता, उसकी संस्कृति - सभ्यता - विचारधारा पर आघात करने के अनेक मार्ग होते है।
एक वह है जिसमें सीधा आक्रमण किया जाता है। आतंक फैलाकर लूटमार करना, दमन और अत्याचार करना यह दृश्य मार्ग है और यह तत्काल प्रभाव दिखाने लगता है।

दूसरा मार्ग अप्रत्यक्ष है इसलिए अदृश्य है। यह दीमक जैसा है जो अंदर से खोखला करता रहता है परंतु पूर्ण नुकसान होने पर ही वह दिखाई देता है !
अंग्रेजों ने यह नीति अपनाई ।

अंग्रेजों ने इस देश में व्यापार का कारण बताते हुए प्रवेश किया। उन्होने देखा कि भारत की संस्कृति अत्यंत प्राचीन है, यह धर्माधिष्ठित संस्कृति हैं, इस संस्कृति में विद्यादान और विद्यार्जन का अत्यंत महत्व है, यहाँ गणित, विज्ञान, वास्तुशास्त्र - स्थापत्यकला, अभियांत्रिकी, खगोलशास्त्र, ज्योतिषशास्त्र , वैद्यकशास्त्र, शिल्पकला, संगीत 
(संगीत = गायन, वादन व नृत्य मिलकर संगीत होता है ) इत्यादी अनेक शास्त्रों का विकास हुआ हैं, यहाँ उच्च गुणवत्ता व कारीगरी के वस्त्र, अलंकार आदि बनाए जाते हैं, यहाँ की शिक्षापद्धति शास्त्रशुद्ध व अनुशासबद्ध है!

सामाज्यविस्तार का हेतू रखनेवाले परकी आक्रमकों ने इन सब को बाधाओं के रुप में देखा। उन्होने यह भी अवश्य देखा होगा की आठ - नौ सौ वर्षों तक एक के बाद एक आक्रमण झेलने के बाद भी इस देश का मनोबल अक्षुण्ण (intact) है। 
वह तो दीर्घकाल तर राज्य करने की मानसिकता रखनेवाले साम्राज्यवादी थे। इतनी संपन्न पार्श्वभूमि के देश को मानसिक रुप से गुलाम बनाने का एक अत्यंत प्रभावशाली मार्ग उन्होने ढूंढ निकाला।

लॉर्ड मेकॉले ने Downward Filtration Theory के अंतर्गत यह विचार प्रस्तुत किया कि इस देश में गिनेचुने नागरिकों को अंग्रेजी पद्धति की शिक्षा दी जाए और उनके द्वारा अन्य नागरिकों को भी वैसी ही शिक्षा दी जानी चाहिए।
स्पष्ट था की भारत के संपन्न - समृद्ध - गौरवशाली ज्ञानभांडार को दूर हटाकर भविष्य में अंग्रेजों के गुलाम बनकर उनके लिए राज्य चलाने की मानसिकता रखनेवाली यह शिक्षापद्धति थी।
हमारे देश का तेजोभंग करने की, अपने धर्म की अतिप्राचीन उज्वल परंपराओं से विश्वास डगमगाने की यह कुटिल योजना थी और विविध धर्म - पंथों का आक्रमण पचाकर और अनेकविध धर्म - पंथो को अपने देश के मुख्य प्रवाह में सहृदयतापूर्वक सहभागी करने के पश्चात भी श्रद्धावान सनातनी हिंदु बने रहनेवाले इस देश के अधिकांश नागरिक इस धूर्त योजना के जाल में फस गए।

धीरे धीरे समाज में अंग्रेजी शिक्षा, रहनसहन, जीवनशैली, विचारधारा आदि का आकर्षण बढने लगा और नीतिमत्ता के कडे नियम व जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का आग्रह करनेवाले धर्म के प्रति ढीढता बढने लगी ।

ऐसी दीमक अंततः समाज को खोखला करती है जिसके कई उदाहरण बाद में सामने आए।

इतिहास बदला नहीं जा सकता हैं किंतु भविष्य बनाया जा सकता है यह ध्यान में रखकर हम इस विषय पर विचार करते रहेंगे।

गर्व से कहे 👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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