#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १३५ - दि. ०६.१०.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १३५: दि. ०६.१०.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

अबतक हमने धर्मानुसार आचरण की भलाई की है व कभी भी अधर्म ना करने संबंधी चर्चा हम कर रहें हैं तो यह प्रश्न स्वाभाविक हैं कि क्या इसका इतना विचार करना भी चाहिये ?
क्योंकि कौरव पाण्डवों की बात तो पुरानी हो गई जब अधर्मी कौरव सत्ता और संपत्ति का उपभोग करते रहे और धर्मपरायण पाण्डव कष्ट भोगते रहे, किंतु अधुनिक युग में भी क्या हो रहा है ?
भ्रष्टाचारी, आतंकवादी, अपराधी और हुकुमशहा धन - संपत्ति पाते हैं, दूसरों को अपने अधीन कर सत्ता का सुख भोगते है और साधारण व्यक्तीयों को अभाव और कष्ट का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में क्या आवश्यकता हैं धर्म - अधर्म के पीछे इतना त्याकुल होने की ?
मनुष्य जीवन मिला हैं तो उसका सार्थक कर लिया जाए, भले ही उसके लिए थोडा पाप ( ? ) क्यों ना करना पडे !

वैसे भी कल किसने देखा है ?
और यह जो अगले जन्म के लिए पुण्य करने की बात हैं, तो किसने देखा है अगला जन्म और किसे याद है पिछला जन्म ?
तो क्या बुराई हैं इस जन्म में सुख भोगने का विचार करने में ?

कभी कभी निराशा अथवा क्रोध में हम ऐसा सोच सकते है। और जिन धर्मों में पुनर्जन्म यह संकल्पना हैं ही नहीं, उन धर्मियों के लिए इस जन्म में मिलनेवाला सुख या दुख यही महत्वपूर्ण होगा।

परंतु हम सनातनी हिंदु है। हम किसी भी जीव का जीवन उसके शरीर से परे मानते हैं। हम मानते हैं कि शरीर बहुत छोटी अवधि के लिए है परंतु आत्मा अमर हैं और मनुष्य जीवन की सार्थकता आत्मा की उन्नति के लिए प्रयत्न करना हैं ।
संक्षेप में हम कह सकते हैं कि सनातन हिंदु धर्म का पट विशाल है (Big canvas)।

इसी श्रृंखला में हम आगे विचार करेंगे और आत्मा की इस यात्रा पर कुछ सोचना - कुछ मनन करना इसके लिए अभी जो पितृपक्ष चल रहा हैं उससे अच्छा समय और कौनसा होगा ! 

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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