#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ८७ - दि. १९.०८.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ८७ : दि. १९.०८.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
गोकुल के वास में कृष्ण के प्राण हरण के लिए कंस ने अनेक उपाय किए थे।
पूतना के पश्चात शकटासुर , तृणासुर, बकासुर (जिसे भीम ने मार दिया था वह भिन्न था) वत्सासुर, अघासुर आदि अनेक रूपों में कृष्ण के जीवन पर संकट आया था। परंतु कृष्ण की अद्भुत शक्तियों के कारण उन सभी असुरों का विनाश हुआ। कृष्ण ने कालिया नामक भयंकर सर्प के आतंक से भी गोकुल को मुक्ती प्रदान की।
परंतु कंस द्वारा गोकुल में कृष्ण के प्राणहरण के इन सारे प्रयत्नों के कारण इसलिए सारे गोकुलवासियों ने अपना निवासस्थान ही बदल दिया। वे अपने कान्हा को लेकर वृंदावन में जा बसे।
सोचिए , वह तो ग्वाले (milkman) थे, कितनी संख्या में गोधन होगा उनका ! स्थानांतरण उनके लिए कठिन ही होगा परंतु कृष्ण की प्राणरक्षा के लिए गोकुलवासियों ने वह भी किया।
यद्यपि विष्णु अवतार होने के कारण कृष्ण के प्राण हरने का सामर्थ्य ऐसे किसी भी असुर में नहीं था, परंतु ग्वाले तो विष्णु अवतार के वास्तव को नहीं जानते थे, इसलिए ऐसा स्थानांतरण उनका कृष्ण के प्रति प्रेम ही दर्शाता हैं !
प्रश्न यह हैं कि कृष्ण को बालरूप मे प्रकट होने की आवश्यकता क्यों थी ?
वयस्क व्यक्ती के रुप में आते और कंस का वध करते। उसके पश्चात भी अपना नियोजित कार्य करते रहते.....
देवकी के गर्भ से जन्म और नंद - यशोदा के घर पलने के नाट्य का कारण क्या था ?
हम नहीं जानते की प्रभु की इस लीला का वास्तव क्या है , परंतु तर्क अवश्य कर सकते है।
वसुदेव - देवकी और नंद - यशोदा के पूर्वकर्म (अर्थात अनेक पूर्वजन्मों के कर्म ) इतने पुण्यकारक होंगे की प्रभु अपने आशीर्वाद का प्रमाण उन्हे देना चाहते होंगे।
प्रत्येक समाज में कुछ अंतर्गत कलह, कुछ अशांतता होती ही है और हर युग में होती है। कदाचित गोकुल में होंगी और मथुरा में भी.... ऐसा समाज अनेक गुटों में विभाजित हो जाता हैं और बाहरी शत्रु का सामना करने का सामर्थ्य खो देता हैं।
ऐसे समाज को एकजुट करने के लिए, एकत्रित होकर धैर्य से और संपूर्ण शक्ती से शत्रु का सामना कर विजय पाने की प्रेरणा देने के लिए किसी लोकोत्तर व्यक्तित्व की आवश्यकता होती है ! यह व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जो समाज के प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक समूह के लिए प्रिय हो, जिसकी रक्षा के लिए समाज का प्रत्येक व्यक्ती अपना सर्वस्व दाँव पर लगाने के लिए भी प्रस्तुत हो !
ऐसे व्यक्तित्व के होने से असामाजिक तत्वों के
षड् यंत्र विफल होते हैं और राज्य / राष्ट्र प्रगतिपथ पर आगे बढता हैं !!!
कृष्ण के बालरूप में कदाचित गोकुल और मथुरा दोनो के नागरिकों ने ऐसे व्यक्ती को देखा जिसका उद्देश और कार्य उनकी इच्छा - आकांक्षा के अनुरूप था, इसलिए अन्य सारे आपसी मतभेद दूर रखकर वह सब एक राज्य के नागरिकों के समान उसके साथ डटकर खडे हुए !
...... कदाचित इसी हेतु से प्रभु ने कृष्ण का बालरूप धारण किया हो सकता हैं !
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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