#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ९२- दि. २४.०८.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ९२ : दि. २४.०८.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
कृष्ण और बलराम ऋषि सांदिपनी के गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने लगे।
उस युग की पद्धति यही थी की गुरु के घर सब विद्यार्थी समान हैं। अर्थात उनका रहन - सहन, भोजन, वस्त्र सब एक समान होगा।
विद्यार्थीयों के घर की सांपत्तिक स्थिती भिन्न - भिन्न हो सकती थी अर्थात कोई धनी तो कोई साधारण स्थिति का हो सकता था, किंतु गुरुगृह में विद्यार्थियों में कोई भेद नही किया जाता था।
गुरु के घर रहनेवाले विद्यार्थी भिन्न भिन्न जाति के भी होते थे, वह सब गुरु माँ की सहायता करते थे, खेत में काम करते थे क्योंकि अनाज तो वही से आता था।
राजपुत्र हो अथवा अन्य कोई, सबको कष्ट करना ही होता था।
इससे हमें हमारी समाजव्यवस्था के संबंध में पुनर्विचार का अवसर मिलता हैं क्योंकि जाति / वर्ण से परे सबके साथ एक समान व्यवहार किया जाता था इसका यह उदाहरण है !
हिंदु धर्म में वर्ण व्यवस्था हैं , भिन्न जातियाँ तो हिंदु धर्म माननेवाले मनुष्यों ने बनाई और अज्ञानतावश और अहंकार के कारण उसे पक्की व्यवस्था बना दिया।
इसका दोष मनुष्य स्वभाव को जाता हैं, हमारे सनातन हिंदु धर्म पर इसके लिए उँगली नहीं उठानी चाहिए।
और यह जो वर्णव्यवस्था की बात हैं जिसमें कुछ वर्ण के लोग स्वयं को श्रेष्ठ मानते हैं और दूसरों को तुच्छता से देखते हैं इसकी निंदा ही करनी चाहिए किंतु यह दोष हिंदु धर्म का नहीं है, मनुष्य स्वभाव का है और यह अनेक धर्मों में / पंथो में हैं।
उदाहरण के लिए ख्रिश्चन धर्म में Protestant और Catholic मुख्य पंथ (sect) हैं। इसके साथ ही Russion Orthodox Church, Greek Orthodox Church, Lutheran आदि विभिन्न sect हैं। युरोप के, विशेषकर युरोपीय राजघरानों के इतिहास से इसके अनेक पहलुओं की जानकारी मिल सकती हैं।
इस इतिहास में विवाह के समय वधु द्वारा अपना sect बदलने के उदाहरण भी हैं और विवाह के पूर्व ही आगे होनवाली संतान को किस sect के अनुसार संस्कार दिए जाएंगे इसके करार किए जाने के उदाहरण भी हैं (जैसे पुत्र को पिता के sect के अनुसार और कन्या को माता के sect के अनुसार)।
मुस्लिम धर्म में शिया और सुन्नी पंथ हैं और इनमें कौन श्रेष्ठ हैं इसको लेकर आपस में तीव्र मत प्रवाह हैं। साथ ही अहमदिया , पस्मंदा आदी जातियाँ, दाऊदी बोहरा पंथ भी हैं और इनमें आपसी मतभेद भी हैं।
ज्यू धर्म के अनुयायी भी मुख्यतः Haredi, Dati, Masorti, Hiloni इन चार गुटों (group) में विभाजित हैं।
उपर उल्लिखित उदाहरणों से यह स्पष्ट हैं कि लगभग सभी धर्मों में भिन्न - भिन्न गुट है और 'हम श्रेष्ठ, बाकी कनिष्ठ' ऐसा अहंकार भी हैं !
तात्पर्य यही हैं कि सभी के घर काँच के हैं, इसलिए किसी को भी दूसरों के घर पर पथ्थर नहीं फेंकने चाहिए !
अच्छा यही होगा की प्रत्येक धर्म के अनुयायी अपनी अपनी काँच की दिवार को स्वच्छ करें !
और सनातन हिंदु धर्म के हम अनुयायियों का चाहिए की अन्य धर्म के अनुयायी जो हमपर जातिव्यवस्था के कारण हँसते हैं, आलोचना करते हैं (condemn) उसके कारण हममें जों हीनभावना आ जाति हैं उसे झटक कर अपने हिंदुत्व पर गर्व करें ।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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