#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १५३ - दि. २४.१०.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १५३: दि. २४.१०.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 
 
आज विजयादशमी अर्थात दशहरे के पर्व पर सभी का शुभचिंतन !

यह सुखद योगायोग हैं कि परकी आक्रमकों द्वारा हमारे देश पर सत्ता स्थापित करने के विषय पर हम आज से विस्तृत विचार प्रारंभ करेंगे।

परकी आक्रमणकारीयों ने केवल राजनैतिक सत्ता प्रस्थापित नहीं की, बल्कि हमारे सनातन हिंदु धर्म पर ही धावा बोल दिया। 
हमारी पुरातन संस्कृती, सभ्यता, उसमें से प्रवाहित हो रहा ज्ञान और पवित्र परंपराएँ,  उसके आदर्श उन्हे एक आँख नहीं सुहाते थे। 
उन्होने इस देश के सबसे प्राचीन और अत्यंत उदात्त धर्म के अनुयायीयों का तेजोभंग करने का अत्यंत क्रूर अभियान प्रारंभ किया। 
प्रलोभन देकर ना माने तो कभी भय दिखाकर और सदैव दमन कर उन्होने सनातनी हिंदुओं में आतंक निर्माण किया..
उन्हें धर्मांतरण के लिए बाध्य किया..
फिर भी जो नहीं माने उनपर अत्याचार किए..

हमारे सम्मुख आदर्श कौनसे थे ?
सर्वप्रथम तो श्रीराम !
अत्यंत सौम्य व्यक्तित्व के लिए सुविख्यात मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम !
किंतु श्रीराम की सौम्यता निजी जीवन के लिए थी।
ज्येष्ठ, गुरुजन, सगेसंबधी, मित्र, प्रजाजन इनके लिए श्रीराम विनम्र, आज्ञाकारी और सौम्य थे।
किंतु अत्याचारी और असुरों के लिए वह साक्षात काल बनते थे।

किशोर वय में ही ब्रह्मर्षि विश्वामित्र के अनुरोध पर उन्होने असुर - संहार का सत्र आरंभ किया। उनके वनवास काल में भी उन्होने वनवासी और नगरों में रहनेवालों को असुरों के आतंक से मुक्ती दिलाई।

और रावण ❗
इस राक्षस ने श्रीराम - सीताजी का अक्षम्य अपराध किया। दूसरे की पत्नी का बलात् हरण करने के पातक को क्षमा करना संभव नहीं था।

जिन श्रीराम को हम सौम्य कहते हैं उन्होने अपने इस प्रबल शत्रु को उसी के घर में घुसकर मारा !
उसके साथ उसके अत्याचारी पुत्र और सहयोगीयों को भी मार दिया !

यह आज का ही दिन था। विजयादशमी के दिन विश्व को रावण से मुक्ति दिलाई थी श्रीराम ने !

और हम हिंदुस्थानियों ने क्या किया ?
परकी आक्रमकों से या तो डर कर दुबक के बैठ गए अथवा शरणागती का मार्ग अपनाया अथवा अपने स्वार्थ के लिए उनसे मित्रता कर 'अपने' ही देशवासियों का राज्य हथिया लिया !
लाचारी की चरमसीमा यह थी की अपनी बहन - बेटियों को यवन बादशाहों के हरम में धकेला !

असुर के घर में घुसकर अपनी पत्नी की मुक्तता करनेवाले श्रीराम के भक्तों ने ऐसे निंदनीय काम किए !

श्रीराम का पवित्र नाम जपते हुए हम इस इतिहास को ना दोहराने का प्रण करेंगे !
यदि भविष्य बनाना है और  हमारे धर्म की (अर्थात स्वयं की) रक्षा करनी ही हैं तो पिछले १००० वर्षों के इतिहास के पृष्ठों में झाँकना होगा। इतिहास की भूलों से सीखने के लिए हमारे इस काले इतिहास को हम पुनः देखेंगे !

गर्व से कहे 👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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