#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १४६ - दि. १७.१०.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १४६: दि. १७.१०.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
जो आँखो से देखा जाता है वह अंतिम सत्य नहीं है, सत्य उससे भी परे है, विशाल - विस्तृत और गहन है यह संस्कार एक अत्यंत महत्वपूर्ण पद्धति से सनातन हिंदु धर्म में किया जाता है।
यह क्रिया है मनुष्य देह की अंत्येष्टि !
सनातन हिंदु धर्म के अनुसार देह अशाश्वत है किंतु आत्मा अमर है। अर्थात देह बदलते रहते है किंतु आत्मा की यात्रा निरंतर चलती रहती है। यानि देह (शरीर) जिसे हम देख सकते है , स्पर्श कर सकते है वह थोडी अवधि के लिए है और आत्मा - जो निराकार है, जिसका कोई रंग - रुप नहीं है, जिसे स्पर्श करना भी संभव नहीं है वह चिरंतन है, कभी भी नष्ट नहीं होता है।
इसलिए सनातनी हिंदु मृत्यु के पश्चात शरीर का दाह संस्कार करते है। अग्नि में जलकर शरीर नष्ट होता है। शरीर के दाह ना होनेवाले भाग (अस्थियाँ) नदी में विसर्जित किए जाते है। अर्थात यह स्पष्ट है कि मृत व्यक्ति के शरीर के किसी भी भाग का जतन नहीं किया जाता है।
इससे सगेसंबधीयों को भी उस व्यक्ति के देहत्याग का सत्य स्वीकाराने में सहायता मिलती है क्योंकी मृत देह के अस्तित्व के किसी भी स्मरणचिन्ह से स्मृतियाँ अधिक तीव्रता से जागृत होती है। कदाचित मन को उनके 'ना होने' का सत्य स्वीकारने में कठिनाई होती है।
साथ ही आत्मा को देह से जो लगाव होता है उसे तोडकर आत्मा का (उन्नति की ओर) अगली यात्रा के लिए मुक्त करने के लिए भी दाह संस्कार आवश्यक माना जाता है।
जिस व्यक्ती से हम प्रेम करते है उसे (मृत्युपश्चात) अग्निसात करने की विधि मनुष्य को अशाश्वत और शाश्वत का भेद सही अर्थो में समझने में सहायता करती है ।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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