#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग १०१ - दि. ०२.०९.२०२३
हिंदु धर्मसंस्कार
भाग १०१: दि. ०२.०९.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
श्रीकृष्ण ने अपने मानव अवतार में युद्ध में प्राप्त किए विजय और पूर्णतः विजय प्राप्ती के पश्चात भी स्वार्थरहित वृत्ती से स्वयं बाजू होकर इतरों को सौंपी हुई सत्ता इसके उदाहरण हमने देखें हैं।
किंतु कभी कभी विचित्र परिस्थितियों से भी उनका सामना हुआ था। ऐसे में उनके द्वारा लिए गए निर्णय और उनकी कृती मानव जीवन के उच्चतम मूल्यों का दर्शन कराती हैं।
जैसे नरकासुर द्वारा अपहरण कर बंदिवान बनाई गए १६१०० राजकन्याओं की मुक्ती का प्रसंग हैं।
श्रीकृष्ण की रासलीला के अतिरंजित और काल्पनिक वर्णनों के कारण उन्हे स्त्रैण कहा जाता रहा है। साथ ही उनकी १६१०८ पत्नियाँ होने का भ्रम भी फैलाया गया है और हम हिंदु भी यह पातक कर रहें हैं।
वास्तविक स्थिती को जानकर श्रीकृष्ण की विचारधारा में निहित तत्वों को समझना महत्वपूर्ण हैं।
नरकासुर नामक राक्षस प्रागज्योतिषपुर (आधुनिक गुवाहाटी) का राजा था। इसे भौमासुर भी कहा जाता था। वह अत्यंत अत्याचारी था। उसने अनेक राज्यों से राजकन्याओं का अपहरण कर उन्हे बंदीवान बनाया था।
नरकासुर द्वारा आतंकित, पिडित, अत्याचारित और अपमानित इन राजकन्याओं की स्थिती करुण थी।
श्रीकृष्ण ने नरकासुर के बंदिवास से इन राजकन्याओं को मुक्त किया।
किंतु राक्षसगृह में रह चुकी कन्याओं को कौनसा राजकुल पुनः घर वापस लेता ?
इस कारण वह अनाथ हो गई।
अब यह १६१०० कन्याएँ कहाँ जाएगी ?
ना उनका कोई घर था ..
ना सगे - संबधी ..
इस विशाल विश्व में पुनः वह असुरक्षित हो गई थी।
श्रीकृष्ण ने इन सभी १६१०० स्थियों को आसरा दिया, घर दिया, सम्मान से जीवनयापन के लिए एक पर्याय दिया। वह उनके 'पति' बने।
परंतु यहाँ पति शब्द का अर्थ हैं 'पालक' (पालन करनेवाला अर्थात माता - पिता समान )।
यहाँ पालक शब्द का अर्थ 'विवाहित पति' ऐसा नहीं हैं। संस्कृत भाषा में पति यह शब्द स्वामी (owner उदाहरण : गडपति = किलों का स्वामी, गजपति= हाथियों का स्वामी) इस अर्थ से अथवा पालक इस अर्थ से भी उपयोग किया जाता है।
अर्थात श्रीकृष्ण ने इन कन्याओं के पालन - पोषण का भार स्वयं लिया। उनके इस करुणापूर्ण निर्णय को उनकी अनेक पत्नियाँ होने का नाम देकर उन्हे स्खलित अथवा स्त्रैण कहना अथवा उनपर हँसना हमारा अज्ञान है और यदि यह भ्रम जानबूझकर फैलाया जा रहा हैं तो यह वृत्ती की नीचता का निदर्शक हैं।
हम सनातनी हिंदुओं को अपने देवताओं के रुप, उनका कार्य, उनकी भूमिका (stance), उनके निर्णय व कृति इस संबध में दी जानेवाली प्रसिद्धी (साधारण अर्थ : प्रतिमा निर्माण) संबंधी जागरुक रहना आवश्यक है।
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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