#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ८९ - दि. २१.०८.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ८९ : दि. २१.०८.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

बालक कृष्ण का गोकुल व वृंदावन में वास्तव्य आनंददायक था।
परंतु इधर मथुरा में कंस की चिंता का अंत नहीं था। कान्हा की किर्तीगाथा उसे विचलित कर रहीं थी। हो ना हो, यही बालक उसका काल बननेवाला हैं इस भय से वह कृष्ण की हत्या करने के उपाय सोचता रहता था।

उसने अब एक नई योजना बनाई। किंतु वास्तव में यह योजना कृष्णनाश की ना होकर उसकी अपनी मृत्यु का कारण बननेवाली हैं यह भविष्य कंस देख नहीं पाया।
मथुरा के धनुर्याग (युद्धक्रीडा का समारोह) में कृष्ण को आमंत्रित करने के लिए कंस ने अक्रूर के माध्यम से निमंत्रण भेजा। 
अक्रूर भी नाते से कृष्ण के मामा थे। वह भगवान विष्णु के परम भक्त थे। इसलिए कृष्ण से मिलने का अवसर पाकर वे आनंदित हुए। क्योंकि कंस के अधीन रहने के कारण वे अबतक कृष्ण के दर्शन नहीं कर पाए थे।

कंस के आमंत्रण की वार्ता सुनकर नंद - यशोदा और सभी गोपाल चिंतित हुए। कृष्ण के प्रति कंस के रोष से को सभी जानते थे। 
परंतु यह आमंत्रण नकारने जैसा नहीं था। भला कंस के आमंत्रण का अवमान साधारण गोपाल कैसे कर पाते ! 
इसलिए सभी व्याकुल हुए। उनका लाडला कान्हा.... धनुर्याग का निमित्त कर कंस पुनः उसके प्राणहरण का प्रयत्न करेगा यह निश्चित था, किंतु वे सब असहाय थे। फिर भी गोपालों को एक क्षीण आशा थी की कृष्ण की अल्प आयु के कारण नंद मान्यता नहीं देंगे।

इधर नंद ने अक्रूर का यथोचित स्वागत किया था, किंतु कृष्ण ने धनुर्याग में सम्मिलित होने के लिए सहर्ष सहमति दी थी। 
इस वार्ता को सुनते ही गोप - गोपिकाएँ बेचैन होकर नंद के घर आने लगे। 

उनका लाडले ने संकट के महाभयंकर मुख में प्रवेश करने का निर्णय लिया था इसलिए उसके प्राणभय के कारण गोपिकाएँ विलाप कर रहीं थी, मथुरा ना जाने के लिए कृष्ण से पुनःपुन्हा बिनती कर रही थी। 

दूध - दही - मख्खन देने के लिए प्रेमभरा आग्रह करनेवाला नटखट कान्हा, वह धनुर्याग में क्या करेगा, कंस तो निष्ठुर है, क्रूर हत्यारा है यह सब निष्पाप कृष्ण समझ नहीं पा रहा हैं यही उनकी भावना थी, इसलिए उनका मातृहृदय कृष्ण के लिए विव्हल हो रहा था....

गोपिकाओं का कृष्ण के प्रति प्रेम इतना सुंदर, ऐसा निश्चल और अत्यंत पवित्र हैं !
और हम ?
कृष्ण की गोपिकाओं के साथ रासलीला का वर्णन विषयवासना के मिश्रण के साथ करते हैं, राधा नामक गोपी के साथ कृष्ण जमुना के घाट पर स्नान करते थे इस वर्णन में विकृती का कितना अमंगल भाव है यह हम हिंदु समझते ही नहीं हैं।

जिस कृष्ण ने भगवद्‌गीता में यह बताया हो की 'जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र का त्याग कर नए वस्त्र धारण करता हैं उसी प्रकार पुराने शरीर को त्यागकर आत्मा नूतन शरीर धारण करता हैं' वह कृष्ण (बाल्यावस्था में भी !) भौतिक सुख का मोह रखते होंगे यह सोचना भी अज्ञानता की परमसीमा हैं !

सनातन धर्म के जाज्वल्य अभिमानियों को चाहिए की हम अपने महापुरुषों को समझे और औरों को भी समझाए !

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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