#हिंदु-धर्मसंस्कार : भाग ८६ - दि. १८.०८.२०२३

हिंदु धर्मसंस्कार
भाग ८६ : दि. १८.०८.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩

गोकुल में कान्हा की बाललीलाएँ
साहित्यकृतीयों के लिए प्रिय विषय रहा हैं। इसपर आधारित कविता, कहानियाँ, उपन्यास, नाटक,  नृत्यनाट्य आदि हजारो वर्षों से हमारी संस्कृति का भाग बने हुए हैं।
कृष्ण की गोपियों से छेडछाड और रासलीलाओं के रसपूर्ण वर्णन हम सुनते आए हैं।

यद्यपि यह सब कृतियाँ कृष्ण के प्रति भक्ती, आत्मीयता और प्रेम से ही प्रेरित हैं परंतु इनका परिणाम साधारणत: 'बीज था आम का और पाया हैं करेला' इस प्रकार हुआ है !

कृष्णचरित्र के अनुसार जब वे गोकुल छोडकर मथुरा गए तब उनकी आयु १० वर्ष और ८ मास की थी। और गोकुल से मथुरा जाने के पश्चात वह कभी भी लौटकर नहीं आए हैं।
ऐसा नहीं हैं की कृष्ण के मन में प्रेम, आस्था नहीं थी। 
कृष्ण तो प्रेममय हैं, प्रेममूर्ति हैं परंतु भौतिक जीवन के किसी भी भाग के लिए उनके मन में मोह नहीं रहा हैं। वह सहजता से त्याग करते हैं और प्रत्येक स्थिति में आनंदमय - आनंदमूर्ति ही होते हैं।

हाँ, तो कृष्ण जब गोकुल और वृंदावन में गोपाल बनकर रहते थे तब की स्थिति पर विचार आवश्यक है। 
१० वर्ष की आयु से पूर्व वह गोपियों के साथ जिस प्रकार खेलते होंगे अथवा विशेष पर्व पर नृत्य करते होंगे उसका स्वरूप बालक का अपनी माँ की सखियों के साथ खेलने जैसा होगा। 
अर्थात इसमें गोपियों का भाव भी सखी के नटखट बालक के साथ की गई क्रीडाओं का होगा।
परंतु हम हिंदुओं ने यह सब ना समझते हुए कृष्ण की रासलीला को श्रृंगाररस का प्रतिक बना दिया हैं! 

दस वर्ष तक की आयु में गोपालों के अनेक उत्सवों में, पर्व में, समारोहों में कृष्ण नृत्य करते होंगे।
वैसे भी भारत के अनेक भागों में नृत्य यह समाजजीवन का महत्वपूर्ण अंग हैं, इसके अभाव में उत्सवी स्वरूप की कल्पना नहीं की जा सकती हैं। और कृष्ण तो बाँसुरीवादक थे। वाद्य बजाने में जो निपुण हो उसे ताल का भी ज्ञान होता हैं ! नृत्य तो ताल पर आधारित कला हैं, इसलिए कृष्ण नृत्य के ताल के अनुरूप कुशल नर्तन करते होंगे।

जैसे जंगल के आदिवासी दिनभर व्यस्त रहते हैं, अत्यंत श्रम करते हैं और रात्री में श्रमपरिहार के लिए नृत्य करते हैं, उसी प्रकार गोकुल और वृंदावन में भी ग्वाले - ग्वालिन श्रमपरिहार के लिए नृत्य करते होंगे, वह उनकी सामाजिक परंपरा का अभिन्न अंग था। और इसमें नंद - यशोदा का लाडला नृत्यकुशल बालक रंग भरता होगा।

और हमने इस सारी मधुर स्थिती को कितना विकृत रुप दिया हैं ! गोपियों के साथ कृष्णलीलाओं का वर्णन हमने ऐसा किया हैं जैसे युवा जोडे की प्रेम क्रीडाओं का किया जाता हैं !

कहाँ वह ७ - ८ वर्ष का बालक और उसकी माता की आयु की अथवा उससे भी ज्येष्ठ गोपियाँ .. और कहाँ हमारा श्रृंगाररस से परिपूर्ण वर्णन !
अर्थात अपने ही देवताओं के विषय में भ्रांतियाँ फैलाना कोई हम हिंदुओं से सीखे !

(वैसे श्रीकृष्ण की १६१०८ पत्नियाँ होने का जो आरोप उनपर थोपा जाता हैं उसकी चर्चा भी हम आगे करेंगे)।

गर्व से कहे 👇🏼

हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳

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