#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १६६ - बुधवार दि . २२.११.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 

महाशिवरात्रि के पश्चात महत्वपूर्ण त्योहार हैं होली। 
होली का त्योहार देश के विभिन्न भागों में भिन्न भिन्न प्रकार से मनाया जाता है। पहले भाग मे पूजा का महत्व हैं और दूसरे भाग में मनुष्य की उत्सवी वृत्ती, सामाजिकता आदि उभरकर आते हैं।
रंगों के त्योहार का अपना पृथक उत्साह हैं और यद्यपि शास्त्रों में इसका उल्लेख नहीं हैं किंतु हिंदुओं को एक समाज के रुप में बांधे रखने की एक कडी यह भी है।

हम होलिकादहन के संदर्भ से सनातन हिंदु संस्कृति और परंपराओं को समझ सकते हैं। 
मान्यता हैं कि राक्षसराज हिरण्यकश्यपु की बहन होलिका को अग्नि से भय नहीं था।हिरण्यकश्यपु का पुत्र प्रल्हाद सदैव नारायण का जाप करता था। इस कारण उससे क्रोधित होकर प्रल्हाद को जलाकर मारने के लिए होलिका की उसे होलिका की गोद में बिठाया गया और हिरण्यकश्यपु ने उन्हे घेरकर अग्नि प्रज्वलित करवा दी। परंतु ईश्वरीय चमत्कार से होलिका की जलकर मृत्यु हुई और प्रल्हाद की रक्षा हो गई।

पुनः एकबार हम सनातन हिंदु धर्म के तत्वों को देख सकते हैं , पुनः हमारे देवताओं का दृष्टीकोण सामने उभरकर आता हैं !
यद्यपि हमारा धर्म शांतिप्रिय है किंतु हम शांति, प्रेम और अहिंसा के अतिरिक्त अंधभक्त नहीं है। जहाँ आवश्यकता हो वहाँ दुष्टों के प्राणहरण करने में हमारे देवता झिझकते नहीं हैं। अत्याचारी पिता की अपने पुत्र को ही जलाकर मारने की योजना को ईश्वर ने विफल बनाया और होलिका की मृत्यु सुनिश्चित की !
तो क्या हुआ की वह एक स्त्री थी ?
थी तो राक्षसी वृत्ती की और अपने अत्याचारी भाई का साथ भी दे रही थी। ऐसे में प्रभु ने स्त्रीदाक्षिण्य, दया - क्षमा - शांति आदि तत्वों का मिथ्या उद्‌घोष नहीं किया, उन्होने होलिका को मार दिया !

होली का पर्व इसी सीख को समझने के लिए हैं !

गर्व से कहे 👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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