#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १६७ - शुक्रवार दि . २४.११.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
नए वर्ष का प्रारंभ नए संकल्प लेकर आता है। व्यावहारिक रुप से हमारा कैलेण्डर वर्ष १ जनवरी को प्रारंभ होता है और भारत के अधिकांश संस्थानों में नवीन आर्थिक वर्ष का प्रारंभ १ अप्रैल को होता है।
साधारणतः इसी समय हिंदु नववर्ष चैत्र शुद्ध प्रतिपदा से प्रारंभ होता है।
महाराष्ट्र में इसे गुढीपाडवा कहते हैं, तेलंगणा, आंध्रप्रदेश व कर्नाटक में उगादि / युगादि कहा जाता है।
मान्यता हैं कि इसी दिन ब्रह्मदेव ने सृष्टी की निर्मिति की थी और सतयुग का आरंभ हुआ। इसलिए यह पवित्र दिन माना जाता हैं।
यह भी मान्यता हैं कि भगवान श्रीविष्णु मत्स्य अवतार में इसी तिथी को पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। जैसे की हमने दि. २९.०६.२०२३ के भाग ३६ में देखा था, विज्ञान के अनुसार पृथ्वी पर सजीवों की निर्मिति जल में हुई थी। यह तथ्य विष्णु अवतारों के आख्यान से मेल खाता हैं और ब्रह्मदेव द्वारा विश्वनिर्मिती की कडी भी इससे जुडती है!
आगे भगवान श्रीविष्णु ने इसी तिथि को शंखासुर नामक राक्षस का वध किया था।
यह भी मान्यता हैं कि श्रीराम द्वारा अन्यायी वाली का वध इसी तिथि को किया गया था। इसके पश्चात रावणवध कर माता सीता के साथ प्रभु इसी तिथि को अयोध्या लौट आए थे और प्रजा ने उत्साहपूर्वक गुढी और बन्दनवार (तोरण) से घरों को सजाकर उनका स्वागत किया था।
इस दिन के महत्व की गाथा विस्तृत हैं। हम सनातनी हिंदुओं को इस तथ्य पर गर्व करना चाहिए की हमारा धार्मिक नववर्ष ईश्वर की उपासना से प्रारंभ करने की पद्धति हैं। गुढी, बन्दनवार और रंगोली से घर सजाना और पकवानों का भोग चढाना भी ईश्वर उपासना का भाग है !
यद्यपि भौगोलिक स्थिति के कारण परंपराएँ भिन्न हैं किंतु हम सब नए वर्ष के प्रारंभ में प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि जीवन में मिलनेवाले सभी प्रकार के अनुभव - अच्छे, बुरे, कडवे, तीखे आदि - सहने की शक्ति वह हमें प्रदान करें!
सनातन हिंदु धर्म के मूल्यों की महानता इसी से स्पष्ट है !
गर्व से कहे 👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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