#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १७० - शुक्रवार दि . ०१.१२.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
विवाह संबधी एक और कु - रीत हमारे देश में पाई जाती हैं, बेमेल (mismatched) विवाह की।
मेल ना होने के अनेक कारण हो सकते हैं जैसे आयु में अधिक अंतर, शिक्षा का मेल ना होना, स्वभाव, विचार, वृत्ती भिन्न होना, आर्थिक स्तर का अंतर आदि।
परंतु इनमें से अधिकांश मुद्दो पर पतीपत्नी अपनी सुझबूझ से उपाय कर सकते है।
विचारणीय मुद्दा है आयु में अत्याधिक अंतर का और दुर्भाग्य से ऐसे विवाह हमारे देश में होते रहे है।
यद्यपि स्त्रीशिक्षा के बढते महत्व के कारण ऐसे विवाहों की संख्या घट रहीं हैं किंतु अब भी विभिन्न कारणों से ऐसे विवाह होते हैं।
विवाह संबधी एक और गंभीर मुद्दा विधवा विवाह का भी है। यह सत्य हैं कि हिंदु परंपरा में पत्नी की मृत्यु के पश्चात पुरुष के लिए पुनर्विवाह सामाजिक दृष्टी से कभी भी कठिन नहीं रहा है। किंतु विधवाओं के विवाह हिंदुओ के कुछ गुटों में ही मान्य थे। इसमें स्त्री को कमतर आँकने की ही भावना होती थी और उसे ही पति की मृत्यु के लिए दोषी मानकर उसका पुनर्विवाह नकारना एक प्रकार से स्त्री को दण्ड देनेसमान था।
आधुनिक युग में दोनो ही विषयों पर तार्किक और न्यायसंगत दृष्टीकोन देखा जा रहा हैं यद्यपि यह समस्याएँ पूर्णतः दूर नहीं हुई हैं ।
उल्लेखनीय बात यह हैं कि समय के साथ हिंदु समाज भी बदलाव स्वीकार करता है। क्योंकि सनातन हिंदु संस्कृती परिवर्तनशील है। धर्म के मूल तत्वों पर आस्था कायम रखकर हम इस धर्म का आचरण करनवाले मनुष्यप्राणियों के संबध में प्रागतिक विचार करते हैं और इसी कारण सनातन हिंदु धर्म उच्च स्थान पर विराजमान है और विश्वकल्याण की क्षमता रखता है !
गर्व से कहे👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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