#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १६४ - दि. ०४.११.२०२३

भाग १६४: दि. ०४.११.२०२३

🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩 

प्रत्येक धर्म में विशिष्ट परंपराएँ होती हैं। हम क्रमश: यह देखेंगे की सनातनी हिंदु धर्म की कौनसी परंपराएँ इसे महानता की ओर ले जाती है।

प्रारंभ हम करेंगे हमारे त्योहारों से। 
चूंकि अब विश्वभर में जनवरी से दिसंबरवाला ग्रेगरीयन कैलेण्डर उपयोग किया जाता हैं इसलिए हम इसके अनुसार हमारे त्योहारों की श्रृंखला पर विचार करेंगे।

पहला त्योहार हैं मकर संक्रांति जिसे विविध प्रांतों में उत्तरायण / उत्तरैन, माघी, भोगाली बिहु / माघ बिहु, पोंगल, खिचडी इन नामों से भी जाना जाता है। उत्तर भारत में, विशेषतः पंजाब व हरयाणा में संक्रांति से एक दिन पूर्व 'लोहडी' पर्व मनाया जाता हैं।

मुख्यतः यह सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और कृषि की नई उपज से संबंधित है। इस दिन नए अनाज से, जो उस ऋतु में सेवन के लिए उपयुक्त हैं, विविध पदार्थ / पकवान बनाए जाते हैं जैसे तिल और गुड से बनी मिठाई, बाजरा, चावल की खिचडी और व्यंजन और लाई के प्रकार। 
शीत ऋतु में इन पदार्थों का सेवन उपयुक्त होता है इसलिए इन व्यंजनों को पर्व के निमित्त भगवान को भोग चढाने लिए बनाने की परंपरा हमारे धर्म में निहित वैज्ञानिक दृष्टी का प्रतीक है।

इसके साथ ही संक्रांति विविध प्रांतों में दानपर्व के रूप में मनाई जाती है। उस प्रांत में उपलब्ध विविध पदार्थ जैसे तिल, गुड, कपास, वस्त्र, अनाज आदि दान देने की परंपरा हैं।
एक प्रकार से यह मानसशास्त्रीय उपचार ही है। जो हमारे पास है उसे औरों के साथ बाँटने का संस्कार मनुष्य के मन को उदारता की ओर अग्रेसर करता है। मन से स्वार्थ और संकुचित वृत्ती के बेसुरे भाव नष्ट करने के लिए ऐसी परंपराएँ उपयुक्त होती है।

भारतभर में इस पर्व से जुडी विविध परंपराओं की विशेषता यह हैं कि सभी प्रांतों में यह भिन्न भिन्न प्रकार से सामूहिक त्योहार हैं। कहीं सगेसंबधियों के साथ, कहीं पडोसियों के साथ तो कहीं मेले के रुप में समूह के साथ इसे मनाया जाता हैं। इस प्रकार समाज में एकजूट की भावना निर्माण होती है। आनंद साथ मनाने का संबंध आगे संकट के समय साथ देने तक पहुँचता है इस दृष्टी से यह परंपराएँ निर्माण की गई है।

कहनेवाले यह भी कह सकते है कि 'इसमें कौनसी बडी बात है ? दान देने की, सामुहिक प्रार्थना की पद्धति अनेक धर्मो में है। सनातनी हिंदु धर्म पृथक कैसे हुआ ?"

सत्य हैं !
किंतु यहाँ हम अन्य धर्मों की खामियाँ ढूंढने और उनकी आलोचना करने का उद्देश नहीं रखते है। हम चाहते हैं कि अपनी पद्धति / परंपराओं के मूल में जो उदात्त विचार हैं वह हम समझे और अपनी प्राचीन संस्कृति और धर्म पर श्रद्धा का ज्वार हम सब के मन में उत्पन्न हो!

गर्व से कहे 👇🏼 
हिंदु धर्म की जय 🚩 
भारतमाता की जय 🇮🇳

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