#हिंदु-धर्मसंस्कार🚩: भाग १७४ - सोमवार दि. ११.१२.२०२३
🚩🚩 जय श्रीराम 🚩🚩
परकीयों के आक्रमण जब से हमारे देश में होने लगे थे तब से हमारी मूलतः विशुद्ध गौरवशाली और समृद्ध परंपरा में हीन तत्वों की मिलावट होने के अनेक उदाहरण पाएं जाते हैं।
दुर्भाग्य यह है कि इस मिलावट का सर्वाधिक दुष्परिणाम महिलाओं को ही भुगतना पडा हैं। पिछले कुछ लेखों में हमने देखा हैं कि बालविवाह, सतीप्रथा, जौहार आदि के कारण स्त्रियों का वर्तमान और भविष्य दोनो ही धूमिल हो गया था।
इसके अतिरिक्त उन्हे अनेक बंधनों में जकडा गया। ना केवल उनके वस्त्रों के लिए कडे नियम बनाए गए, बल्कि उनके लिए शिक्षा के मार्ग बंद कर दिए गए, समाज में - कुटुंब में उनका स्थान निम्न स्तर पर आ गया, उनके विचार और मतों की उपेक्षा करना सामान्य बात हो गई। उनसे निर्णय के अधिकार छीन लिए गए।
१२०० वर्ष पूर्व जिन परकी संस्कृतियों ने आक्रमकों के साथ हमारे देश में प्रवेश किया उनके समाज में बच्चों पर पूर्णतः पिता का ही अधिकार होता था। स्त्रियों की भूमिका बच्चों को जन्म देने के लिए और उनके पालनपोषण के लिए महत्वपूर्ण तो थी परंतु उन्हे दाई से अधिक कुछ नहीं माना जाता था। उनके बच्चों के संबध में प्रत्येक निर्णय पति व उसके परिजनों का होता था, माता का मत कभी भी महत्वपूर्ण नहीं रहा। जिन संस्कृतियों में स्त्रियों का स्थान गुलामों के समान था उन समाजो में स्त्रियों से तुच्छतापूर्ण व्यवहार करना यहीं सामान्य बात थी।
दुर्भाग्य से वैदिक परंपरा की बुद्धीमती स्त्रियों के हमारे देश में पुरुषों ने आक्रमकों के इस अंग को अपनाने में अतिरिक्त उत्साह दिखाया।
अनिर्बंध सत्ता किसे अच्छी नहीं लगती हैं ?
इसलिए स्त्रियों की शिक्षा के मार्ग बंद कर उनके अर्थाजन के मार्ग भी बंद किए गए और उन्हे पूर्णतः असहाय बनाकर घर की देहरी के भीतर एक प्रकार से कैद किया जाने लगा।
उल्लेखनीय है कि सुदूर वनों में रहनेवाले आदिवासी, जिनतक परकी आक्रमक नहीं पहुँच पाए थे उनकी संस्कृति में स्त्रियाँ अपने वास्ताविक गौरवशाली स्थान पर बनी रहीं। ना उनके वस्त्र बदले थे, ना उनके स्वच्छंद वनविचरण पर बंधन थे और ना ही उनके जीवनसाथी स्वयं चुनने के अधिकार को छीना गया था। प्रत्येक आदिवासी समाज के अपने नियम थे जो इस सारे काल में भी उन्हीं की संस्कृति की कडीयों से जुडे रहे।
इन 'बाहर से आयी' संस्कृतियों ने हमारी सोच को किस प्रकार प्रदूषित किया है इसपर विचार करना और अपनी सोच पर जमा मैल को हटाकर हमारी प्राचीन गौरवशाली परंपराओं को आधुनिक काल में ढालना हम सबका दायित्व है❗
गर्व से कहे👇🏼
हिंदु धर्म की जय 🚩
भारतमाता की जय 🇮🇳
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